
हर घात पर मात… गए थे ईरान (Iran) पर कब्जा जमाने… जनता को बरगलाने…सत्ता गिराने…पेट्रोल हथियाने… लेकिन बल दिखाने वाले अमेरिका (America) की बुद्धि मात खा गई… ईरान ने धोखे से मारे गए अपने धार्मिक नेता खामेनेई सहित कई रणनीतिकारों की मौत के बावजूद हिम्मत-हौसले के साथ ही दिमाग से लड़ाई लड़ते हुए उस हर देश पर हमले बोलकर कमर तोड़ दी, जो अमेरिका को अपनी भूमि पर सैन्य अड्डे बनाकर हमले की जगह दे रहे थे… इजराइल (Israel) और अमेरिका (US) जैसे दो दिग्गजों से लड़ते हुए ईरान ने कतर, कुवैत, यूएई जैसे कई देशों के उन ठिकानों को नेस्तनाबूत किया, जो अमेरिकी ताकत बने हुए थे… अमेरिका दगाबाज दोगला और बेईमान तो है ही… उसने बातचीत के बीच हमला बोला… लेकिन वो झूठा और बड़बोला भी साबित हुआ है… धमकाकर हौसले पस्त करने वाले ट्रंप की हर धमकी का जवाब ईरान ने चुप्पी, समझदारी और प्रहार से दिया… मजबूरन बातचीत की मेज पर आए अमेरिका ने जब शर्तें लादना चालू की तो ईरानी मेज छोड़ चलते बने… दोगला अमेरिका अपनी जीत के लिए अपने ही देश को हराने पर तुल गया और जो होर्मुज खुलवाने के लिए वो ईरान से भिड़ रहा था उसे खुद बंद करने पर तुल गया… यहां भी अमेरिका नाकाम हो गया… मुंह चिढ़ाते चीनी जहाज बेखौफ गुजर गए… अमेरिका पूरी दुनिया से पंगा लेने की इस नादानी और नाकामी को ढंकने के लिए बातचीत की मेज पर आना चाहता है, लेकिन अब बात और बिगड़ चुकी है… ईरान और अकड़ेगा और अकड़़ू अमेरिका नहीं झुकेगा… लिहाजा मामला फिर अटकेगा… बात तो इजराइल और लेबनान के मुद्दे पर भी बिगड़ेगी, क्योंकि इजराइल लेबनान की धरती पर फल-फूल रहे आतंक को पलने नहीं देगा और ईरान उनकी सलामती की शर्त अमेरिका पर थोपेगा… कुल मिलाकर अमेरिका पगलोट ट्रंप के तुगलकी फैसलों में फंस चुका है… उसकी बंद मु_ी खुल चुकी है… अभी तक धोखे, फरेब, षड्यंत्र और साजिशों से दुनिया को धमकाने वाले अमेरिका का यदि खौफ मिट गया तो रौब भी खत्म हो जाएगा… वो दगाबाज है… जंग में जीते इराक के मुखिया सद्दाम हुसैन को धोखे से लाकर फांसी चढ़ाने वाला, लीबिया के मुखिया कर्नल गद्दाफी को मौत के घाट उतारने वाला, वेनेजुएला के राष्ट्रपति का अपहरण करने वाला अमेरिका अब न केवल सीधी लड़ाई में कमजोर साबित हो चुका है, बल्कि उस मुहाने पर खड़ा है, जहां दुनिया का एक निर्णय उसे तबाह, बर्बाद और सडक़छाप बना सकता है… यदि सभी देश डॉलर में व्यापार करना बंद कर दें तो उसकी करंसी कागज का टुकड़ा बन जाएगी और अमेरिका फस्र्ट की कोशिश बस्र्ट हो जाएगी… वो टैरिफ की टर्र-टर्र भूल जाएगा… अपना देश चलाने के लिए कटोरा लेकर दुनिया के सामने खड़ा नजर आएगा, क्योंकि डॉलर की कीमत से निकम्मे हुए अमेरिकी न कमाना जानते हैं न काम करना… वो मेज पर पड़ा गिलास नहीं उठाते हैं… उसके लिए भी परदेसी बुलाते हैं… अब यदि डॉलर अपनी कीमत खो देगा और ट्रंप की सिरफिरी वीजा नीति से परदेसी लौट जाएंगे तो अमेरिकी भूखे मरने लग जाएंगे…मोहताजी में आए बलशाली अमेरिका के लोग ट्रंप को जूते लगाएंगे और समझ जाएंगे कि बल के लिए बुद्धि भी जरूरी है और बुद्धि के लिए ट्रंप सहित सारे अमेरिकियों को हनुमान चालीसा की केवल यह दो पंक्तियां दोहराना हैं- बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरो पवन कुमार… बल बुद्धि विद्या देहूं हरहूं कलेश विकार… यानी हे पवनपुत्र! हमें बुद्धिहीन, मूर्ख, अज्ञानी समझकर माफ करो और बुद्धि का बल देकर हमारे दिल से दंभ, द्वेष निकालो, ताकि हम इस आफत से मुक्ति पा सकें…
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