
जबलपुर। मां नर्मदा तट गौरीघाट को पवित्र और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे Óभिक्षुक मुक्त अभियानÓ के तहत बड़ी कार्रवाई की गई। निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार के निर्देशानुसार नगर निगम और समाज कल्याण विभाग के संयुक्त प्रयासों से 12 ऐसे भिक्षुकों को उनके गृह निवास भेजा गया, जो अन्य शहरों या स्थानों से आकर यहाँ रह रहे थे।
उपायुक्त अंकिता जैन ने बताया कि अभियान के दौरान मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए निराश्रित बुजुर्गों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया गया, 75 वर्षीय एक वृद्ध महिला, जो बोल पाने में असमर्थ थीं, उन्हें सुरक्षित वृद्धाश्रम पहुँचाया गया। दो अन्य वृद्ध एवं विकलांग महिलाओं को भी वृद्धाश्रम भेजने की पूर्ण तैयारी कर ली गई है, ताकि उन्हें बेहतर चिकित्सा और देखभाल मिल सके। उन्होंने बताया कि काउंसिलिंग और समझाइश के बाद कई भिक्षुकों ने वापस अपने घर जाने की इच्छा जताई। इनमें मुख्य रूप से गिरानी लाल कोल, शालनी रागनी वंशकार, विष्णु चौबे, दयाशंकर वर्मा, बाबूलाल भील, नाथूलाल प्रजापति, रमा चौधरी आदि नाम शामिल हैं। उपायुक्त ने बताया कि जिन भिक्षुकों का कोई सहारा नहीं था या जिन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता थी, उन्हें उचित आश्रय स्थलों में भेजा गया है। उन्होंने बताया कि अनीता सोनी और गुलाब नारायण गुप्ता को शेल्टर होम भेजा गया, आशा बाई को वृद्धाश्रम में स्थानांतरित किया गया है। निगम के इस अभियान का उद्देश्य केवल घाटों से भीड़ कम करना नहीं, बल्कि इन भिक्षुकों को एक गरिमामय जीवन देना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोडऩा है।
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