
उज्जैन। जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने के बाद जनगणना के काम में लगाए जाने वाले कर्मचारियों ने ड्यूटी कैंसिल कराने के लिए जुगाड़ लगाना शुरू कर दिया है। इसके लिए तरह-तरह के जतन किए जा रहे है। उज्जैन सहित प्रदेश के बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, सागर, रीवा में ड्यूटी कैंसिल कराने के लिए अलग-अलग हजारों आवेदन कलेक्टरों, निगम आयुक्तों और वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से आ चुके हैं।
ड्यूटी से मुक्ति के लिए आवेदन करने वाले कर्मचारियों द्वारा वैवाहिक कार्यक्रमों, स्वास्थ्य खराब होना और एलर्जी समेत कई अन्य कारण बताए गए हैं। जिन जिलों में नगर निगम है वहां के नगर निगम आयुक्तों को शहरी क्षेत्र की जनगणना की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में वास्तविक स्थिति को देखते हुए जनगणना न करने के आवेदन पर रिलीफ भी दी जा रही है, लेकिन जिनके मामले में बहाने साफ नजर आते हैं, उन्हें इससे राहत नहीं दी जा रही है क्योंकि जनगणना राष्ट्रीय महत्व का काम है। जिनकी ड्यूटी लगाई जा रही है उन्हें यह भी बताया जा रहा है कि सरकार इसके बदले उन्हें कम से कम 25 हजार रुपए मानदेय पूरी जनगणना पर देगी। जनगणना न करने के लिए मंत्री विधायकों के साथ सीनियर आईएएस, आईपीएस अफसरों से भी सिफारिश कराई जा रही है। इसके अलावा ड्यूटी कटवाने के लिए जो आवेदन जमा हो रहे हैं, उसमें किसी को धूप से एलर्जी बताया जा रहा है तो किसी को पुरानी बीमारियों है। आवेदनों में शिक्षकों द्वारा घरेलू जिम्मेदारियों को भी ढाल बनाया जा रहा है। कई शिक्षिकाओं का तर्क है कि वे घर में अकेली हैं और जनगणना पर जाने से घर के काम और बच्चों की देखभाल प्रभावित होगी। छोटे बच्चों का हवाला देकर नाम कटवाने की कोशिशें जारी हैं, ड्यूटी कटवाने के लिए नेताओं और रसूखदारों से जमकर फोन लगवाए जा रहे हैं।
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