
नई दिल्ली. ईरान की सैन्य यूनिट IRGC ने चेतावनी दी है कि पर्शियन गल्फ (Persian Gulf) में समुद्र (Sea) के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स (Internet Cables) खतरे में हैं. ईरानी न्यूज एजेंसी Tasnim News Agency की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर इन केबल्स को एक साथ नुकसान पहुंचता है- चाहे गलती से या जानबूझकर तो पूरे इलाके में बड़ा इंटरनेट आउटेज हो सकता है. यह सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: तेल ही नहीं, डेटा का भी हाइवे
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जिसे आमतौर पर तेल सप्लाई के लिए जाना जाता है. लेकिन कम लोग जानते हैं कि यह जगह डिजिटल दुनिया के लिए भी बेहद जरूरी है. इसके नीचे फाइबर-ऑप्टिक केबल्स का बड़ा नेटवर्क फैला हुआ है, जो एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट को जोड़ता है. ये केबल्स करीब 17% से 30% तक इंटरनेट ट्रैफिक को संभालती हैं. इतना ही नहीं, ये बड़े-बड़े AI डेटा सेंटर्स और क्लाउड सर्विसेज को भी सपोर्ट करती हैं, जिनका इस्तेमाल दुनियाभर की कंपनियां करती हैं.
केबल कटने पर क्या होगा असर?
अगर ये अंडरसी केबल्स डैमेज हो जाती हैं, तो इसका असर सिर्फ इंटरनेट स्पीड पर नहीं पड़ेगा, बल्कि कई जरूरी सेवाएं भी प्रभावित होंगी. ईमेल, वीडियो कॉल, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और क्लाउड सर्विसेज जैसी चीजें इसी नेटवर्क पर निर्भर हैं. ऐसे में केबल कटने से इंटरनेट धीमा हो सकता है, सर्विसेज बार-बार डाउन हो सकती हैं और कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स सही से काम नहीं करेंगे.
भारत के लिए क्यों है चिंता?
भारत दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट यूजर्स में से एक है और इसकी डिजिटल इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है. ये अंडरसी केबल्स ओमान, यूएई और पाकिस्तान जैसे देशों के जरिए गुजरती हैं, जो मौजूदा तनाव वाले इलाके के पास हैं. अगर यहां कोई बड़ी समस्या होती है, तो भारत में लाखों यूजर्स की इंटरनेट स्पीड कम हो सकती है. इसके अलावा क्लाउड सर्विसेज, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और IT सेक्टर पर भी असर पड़ सकता है. खासकर AI और टेक सर्विसेज पर निर्भर कंपनियों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है.
पहले भी सामने आ चुकी हैं समस्याएं
फ्रांस की कंपनी Alcatel Submarine Networks, जो इन केबल्स को बिछाने का काम करती है, पहले भी “फोर्स मेज्योर” जैसी चेतावनी जारी कर चुकी है. इसका मतलब है कि किसी अप्रत्याशित घटना के कारण कंपनी अपनी सेवाएं देने में असमर्थ हो सकती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी का इंस्टॉलेशन जहाज Ile De Batz भी सऊदी अरब के पास फंसा हुआ है, जिससे मरम्मत और नई इंस्टॉलेशन में दिक्कत आ सकती है.
आगे क्या हो सकता है?
यह स्थिति दिखाती है कि आज की दुनिया में इंटरनेट सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि एक जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बन चुका है. अगर इन अंडरसी केबल्स को नुकसान होता है, तो इसका असर सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया में डिजिटल सेवाओं पर असर पड़ेगा. इस चेतावनी के बाद अब सभी की नजरें इस क्षेत्र पर हैं, क्योंकि यहां होने वाली कोई भी बड़ी घटना सीधे ग्लोबल इंटरनेट और डिजिटल इकोनॉमी को प्रभावित कर सकती है.
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