
इंदौर। स्कूली शिक्षा विभाग में लगभग ढाई करोड़ रुपए का जो गबन पकड़ाया, उसकी जांच कलेक्टर द्वारा करवाई गई और जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन ने कमेटी बनाकर जांच करवाई तो पता चला कि विभाग के चपरासी से लेकर अतिथि शिक्षक और यहां तक कि सहायक संचालक और प्राचार्य तक इसमें लिप्त हैं। अलग-अलग निजी खातों में यह सरकारी राशि जमा कराई गई। हालांकि कुछ राशि की वसूली भी हुई है। अब इसमें लिप्त सभी लोगों की विभागीय जांच के साथ-साथ एफआईआर भी दर्ज कराई जा रही है। इसमें मुख्य रूप से सिद्धार्थ जोशी नामक चपरासी की भूमिका सामने आई है।
यह गड़बड़ी 2017 से लेकर 2022 के बीच की गई और इसमें से कुछ कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो गए हैं। अभी जिन 5 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाना है उसमें चपरासी सिद्धार्थ जोशी प्रमुख है, जिसने अपनी पत्नी-पुत्र और अन्य परिजनों के 8 खातों में लगभग पौने 2 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा करा दी। 1 करोड़ 75 लाख 62,277 रुपए की राशि की वसूली जोशी से होगी। वहीं एक अतिथि शिक्षक मोहन डांगी के खाते में 8 लाख 41 हजार 390 रुपए जमा हुए, तो एक अन्य चपरासी पवन खामोद के खाते में 32800 रुपए, वहीं सहायक ग्रेड-2 छोटेलाल गौड़, जिनकी मृत्यु 14.10.2023 को हो चुकी है, के खाते में 1 लाख 16 हजार 750 रुपए जमा हुए। इसी तरह पांचवें आरोपी अतिथि शिक्षक केदार नारायण दीक्षित के खाते में 16 लाख 66 हजार 259 रुपए जमा हुए।
इस तरह इन पांच खातों में 2 करोड़ 2 लाख 19 हजार 476 रुपए की राशि जमा हुई, जबकि लगभग 25 लाख रुपए की राशि वसूल भी हो चुकी है। जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन के मुताबिक, इस पूरे मामले की जांच कमेटी बनाकर करवाई गई, जिसमें 5 आरोपी तो तय हुए। वहीं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच कराई जा रही है, क्योंकि उनके लॉग इन पासवर्ड का उपयोग कर ही इस राशि को ट्रांसफर किया गया, जिसमें प्राचार्य ओपी वर्मा, अनिता चौहान, महेश खोटे, डॉ. शांता स्वामी के अलावा राजेन्द्रसिंह जाधोन, मेघना चाल्र्स, दिनेश पंवार की विभागीय जांच की जाएगी। जांच में यह भी पता चला कि इस पूरे मामले में लगभग 19 लोग शामिल रहे और राशि को मंजूर करने के मामले में भी आधा दर्जन अधिकारी शामिल रहे, जिनमें सहायक संचालक भार्गव के अलावा प्राचार्य विजया शर्मा व अन्य के नाम मिले हैं। आवास भत्ता, वॉशिंग भत्ता और ऐसे अन्य मदों के जरिए भी राशि अवैध रूप से ट्रांसफर की गई। कलेक्टर के निर्देश पर जो जांच कमेटी बनाई गई, उसमें संभागीय संयुक्त संचालक कोष और लेखा दिव्या शर्मा के साथ मनीष दुबे, प्रतीक गौड़, गुंजन तेजावत, चेतना पटेल, सिंपल पटेल, सजल सक्सेना, सुनंदा बघेल, अमान नकवी और निधि कटियार आदि शामिल रहे। कलेक्टर वर्मा के मुताबिक भी इस गबन में इस्तेमाल पूरी राशि की सख्ती से वसूली संबंधित आरोपियों से की जाएगी और दोषियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जा रही है।
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