तेहरान। ईरान में पाकिस्तान (Pakistan in Iran) की मेजबानी में हो रही शांति वार्ता को लेकर असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है। ईरानी सांसद महमूद नबावियान (Mahmud Nabawian) ने साफ कहा है कि इस प्रक्रिया में परमाणु मुद्दा (Nuclear issue) शामिल करना एक “रणनीतिक गलती” थी, जिससे विरोधी पक्ष और ज्यादा आक्रामक हो गया है।
“परमाणु मुद्दा उठाना गलत फैसला”
संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सदस्य नबावियान ने कहा कि पाकिस्तान में हुई बातचीत में ईरान को परमाणु मुद्दा शामिल नहीं करना चाहिए था। उनके मुताबिक, इस कदम ने अमेरिका को और ज्यादा मांगें रखने का मौका दे दिया।
पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाने पर भी सवाल
नबावियान ने पाकिस्तान को मध्यस्थ चुनने के फैसले पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका मानना है कि इस मंच ने अमेरिका को ज्यादा कूटनीतिक बढ़त दिला दी।
अमेरिका की शर्तें क्या हैं?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने 60% तक समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम भंडार को खत्म करे और इस पर करीब 20 साल तक रोक लगाए। हालांकि तेहरान ने इन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है।
ट्रंप ने बढ़ाया सीजफायर, नाकाबंदी जारी
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम (सीजफायर) की अवधि बढ़ाने का ऐलान किया है, हालांकि इसकी समयसीमा स्पष्ट नहीं की गई है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया है कि जब तक ईरान कोई ठोस प्रस्ताव नहीं देता, तब तक नाकाबंदी जारी रहेगी।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि किसी भी स्थायी समझौते के लिए ईरान को अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को छोड़ना होगा—एक ऐसी शर्त जिसे ईरान लगातार खारिज करता रहा है।
ईरान की सख्त प्रतिक्रिया
वहीं अब्बास अराघची ने अमेरिकी नाकाबंदी को “युद्ध कृत्य” करार देते हुए चेतावनी दी है कि ईरान इस दबाव का कड़ा जवाब देगा।
बढ़ते कूटनीतिक तनाव के बीच यह साफ है कि शांति वार्ता की राह अभी आसान नहीं है और मध्यस्थता की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
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