
इन्दौर। न्यायालयों में चल रहे छोटे लंबित प्रकरणों का निराकरण करने तथा जिलों में कैदियों की संख्या कम करने के उद्देश्य से आज सेंट्रल जेल में लोक अदालत लगाई गई। जिसमें 30 प्रकरणों का निराकरण आपसी समझौते के जरिए किया गया।
केंद्रीय जेल अधीक्षक अलका सोनकर ने बताया कि राजीनामा योग्य 30 प्रकरण जेल प्रशासन ने लोक अदालत में रखे थे, जो तीन वर्षों और उससे ज्यादा समय से लंबित थे। सुबह शुरू हुई लोक अदालत में एडीजे अपर सत्र न्यायाधीश अयाज खान एवं न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मुकेश गुप्ता ने कैदियों के इन मामलों को सुना और आपसी समझौते के जरिए उनका निराकरण किया।
जेल के मुख्य सभा कक्ष में हुई लोक अदालत में कैदियों को सुबह से ही बैठा दिया गया था। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर लगाई गई इस लोक अदालत के मौके जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डालसा के सचिव शिवराज गवली ने जेल में निरुद्ध कैदियों को नि:शुल्क विधिक सहायता एवं उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की लोक अदालत से लोगों का न्याय प्रणाली की प्रति विश्वास भी बढ़ा है।
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