तेहरान। पश्चिम एशिया (West asia) में जारी तनाव के बीच मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू (President Mohamed Muizzu) के बयानों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिका ने उनके हालिया बयानों पर कड़ा रुख अपनाते हुए मालदीव सरकार (Maldives government) से स्पष्टीकरण मांगा है।
दरअसल, मोहम्मद मुइज्जू ने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाईयों पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि मालदीव अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी सैन्य हमले के लिए नहीं होने देगा। इस बयान के बाद अमेरिका ने इसे गंभीरता से लिया।
अमेरिका ने क्या कदम उठाया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर और विदेश विभाग की अधिकारी बेथनी मॉरिसन ने मालदीव की विदेश मंत्री इरुथिशाम एडम से बातचीत की। इस दौरान मुइज्जू के बयानों पर चर्चा हुई।
अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के ब्यूरो ने कहा कि मालदीव की ओर से आश्वासन दिया गया है कि वह अमेरिका के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखना चाहता है और भविष्य में सहयोग जारी रहेगा।
क्या बोले थे मुइज्जू?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहम्मद मुइज्जू ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि ईरान पर हुए हमले नहीं होने चाहिए थे। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर जवाबी कार्रवाई होनी है तो सीधे इजरायल पर होनी चाहिए और “दिन-रात हमले” किए जाने चाहिए। इस बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
ट्रंप के दूत से मिलने से भी किया इनकार
विवाद को और बढ़ाते हुए मुइज्जू ने मार्च में सर्जियो गोर से मिलने से भी इनकार कर दिया था, जब वे माले दौरे पर थे। हालांकि गोर ने मालदीव के विदेश और रक्षा मंत्रियों से मुलाकात की, लेकिन राष्ट्रपति के साथ उनकी बैठक नहीं हो सकी।
इस पर मुइज्जू ने कहा था कि अगर बातचीत का विषय युद्ध है, तो उन्हें इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने दोहराया कि मालदीव की जमीन का इस्तेमाल किसी भी सैन्य संघर्ष के लिए नहीं होने दिया जाएगा।
बढ़ता कूटनीतिक तनाव
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम से अमेरिका और मालदीव के रिश्तों में असहजता बढ़ सकती है। हालांकि, दोनों देशों ने फिलहाल संवाद बनाए रखने और संबंधों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की बात कही है।
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