
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रवींद्र जयंती के अवसर पर महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने सरकार की ओर से रवींद्र जयंती समारोहों के लिए तीन जगहों पर मांगी गई अनुमति को नामंजूर किए जाने का मुद्दा भी उठाया। ममता बनर्जी ने कहा कि रवींद्र जयंती मनाने के लिए तीन जगहों पर अनुमति मांगी गई थी, लेकिन इसे अस्वीकार कर दिया गया।
ममता बनर्जी ने कहा कि इस कारण मैंने अपने आवास पर ही कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला लिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आयोजकों को सजावट का सामान उपलब्ध कराने से भी मना किया गया। उन्होंने इस अवसर पर सभी समान विचारधारा वाले दलों से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को रोकने की अपील की।
टीएमसी प्रमुख ने एक्स पर एक पोस्ट में विश्व-प्रसिद्ध विचारक और कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर को शाश्वत मार्गदर्शक प्रकाश बताया। इसके साथ ही उन्होंने जयंती को बांग्ला भाषा, संस्कृति और विरासत के पुनर्जन्म का एक भव्य उत्सव बताया। उन्होंने टैगोर के जीवन दर्शन को दैनिक यात्रा के लिए प्रेरणादायक बताया। बनर्जी ने कहा कि टैगोर ने हमें सिखाया है कि विभाजन सत्य नहीं है, बल्कि एकता ही सत्य है। उन्होंने आक्रामक राष्ट्रवाद की भावना से ऊपर उठकर पूरी मानवता के लिए एकता का महान मंत्र दिया।
बनर्जी ने टैगोर की एक कविता की पंक्तियों का भी उल्लेख किया: “ओ मेरे दिल, धीरे-धीरे जाग इस पवित्र तीर्थ स्थल पर, इस महान आत्मा के सागर तट पर।” उन्होंने कामना की कि इस विश्व-प्रसिद्ध कवि के शाश्वत आदर्श, दूरगामी विचार, जागृत चेतना और रचनात्मक प्रतिभा दुनिया भर के लोगों के मन में और भी अधिक तीव्रता से चमके।
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