
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore) ने भारतीय समाज को (To Indian Society) नई सोच, रचनात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक आत्मविश्वास दिया (Gave New Thinking, Creative Energy and Cultural Confidence) । ‘पोइला बोइशाख’ यानी बंगाली कैलेंडर के 25वें दिन ‘पोचिशे बोइशाख’ के खास अवसर पर देशभर में महान कवि, दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि दी गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि गुरुदेव टैगोर असाधारण प्रतिभा के धनी लेखक, चिंतक और कवि थे। उन्होंने एक महान दार्शनिक, शिक्षाविद, कलाकार और भारत की सभ्यतागत आत्मा की कालजयी आवाज के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। पीएम मोदी ने कहा कि टैगोर ने मानवता की गहरी भावनाओं और भारतीय संस्कृति के श्रेष्ठ आदर्शों को अपनी रचनाओं में अभिव्यक्ति दी। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के विचार आज भी लोगों के मन को रोशन कर रहे हैं और आगे भी मार्गदर्शन देते रहेंगे।
उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि ‘पोचिशे बोइशाख’ के अवसर पर, मैं गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जी को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। गुरुदेव टैगोर का योगदान साहित्य के क्षेत्र से कहीं अधिक व्यापक था। एक अग्रणी विचारक, कलाकार और शिक्षाविद् के रूप में, उनकी रचनाओं में भारतीय सभ्यता की समृद्धि और मानवता के सार्वभौमिक मूल्यों की झलक मिलती है, जिन्होंने समाज और आने वाली पीढ़ियों पर एक अमिट प्रभाव छोड़ा है। इस विशेष अवसर पर, हम समाज और मानवता के प्रति गुरुदेव के असाधारण योगदान को याद करते हैं। कामना है कि उनकी कालजयी शिक्षाएं निरंतर हमारे मनों को आलोकित करती रहें और हमारी सामूहिक यात्रा को प्रेरित करती रहें।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी गुरुदेव को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने साहित्य, संगीत और दर्शन के माध्यम से गुलामी के दौर में स्वतंत्रता की चेतना को नई ताकत दी। अमित शाह ने कहा कि टैगोर केवल महान कवि ही नहीं थे, बल्कि भारतीय आत्मा की सशक्त आवाज भी थे। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के शब्दों में संवेदनशीलता, विचारों में स्वतंत्रता का संदेश और उनकी रचनाओं में विश्व बंधुत्व की भावना साफ दिखाई देती है। अमित शाह ने आगे कहा कि टैगोर की अमर कृति गीतांजलि ने मानवता, अध्यात्म और संवेदनशीलता को नई दिशा दी। वहीं ‘जन गण मन’ के जरिए उन्होंने देश की एकता, गरिमा और आत्मसम्मान को आवाज दी। उन्होंने कहा कि गुरुदेव का जीवन स्वतंत्र सोच, मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक समन्वय की प्रेरणा देता है।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें कालजयी कवि, महान दार्शनिक और रहस्यवादी चिंतक बताया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के सार्वभौमिक मानवतावाद और सद्भाव के आदर्श आज भी पूरी मानवता को प्रेरित कर रहे हैं।
बता दें कि रवींद्रनाथ टैगोर जयंती हर साल बंगाली महीने बैशाख की 25वीं तारीख को मनाई जाती है, जिसे ‘पोचिशे बोइशाख’ कहा जाता है। इस वर्ष पश्चिम बंगाल में यह उत्सव 9 मई को मनाया जा रहा है। 7 मई 1861 को कोलकाता के प्रसिद्ध जोड़ासांको ठाकुर बाड़ी में जन्मे रवींद्रनाथ टैगोर, शारदा देवी और देवेंद्रनाथ टैगोर के पुत्र थे। उन्होंने बचपन से ही लेखन शुरू कर दिया था और जल्द ही अपनी प्रतिभा से अलग पहचान बना ली। वर्ष 1913 में वे साहित्य का नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय बने। ‘बंगाल के बार्ड’ के रूप में प्रसिद्ध टैगोर ने भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका के राष्ट्रगान भी लिखे।
रवींद्रनाथ टैगोर जयंती पर पश्चिम बंगाल समेत देशभर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, कविता पाठ, नृत्य नाटक और ‘रवींद्र संगीत’ की प्रस्तुतियां आयोजित की जाती हैं। स्कूल, कॉलेज और सांस्कृतिक संस्थान उनकी साहित्यिक और कलात्मक विरासत को याद करते हुए विशेष आयोजन करते हैं। गुरुदेव की रचनाएं आज भी साहित्य, संगीत, कला और दर्शन के क्षेत्र में लोगों को गहराई से प्रेरित करती हैं।
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