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एक अनोखा विवाह समारोह, न नौकरी रही, न संस्था… फिर भी बेटे की तरह दिव्यांग की शादी को उत्सव बना दिया

May 17, 2026

  • 1 दर्जन से अधिक संस्थाओं सहित 300 कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न

इन्दौर। आमतौर पर शादियों के बाद दिए जाने वाले भोज के आयोजन में पारिवारिक रिश्तेदार और मित्र शामिल होते हैं, लेकिन एक दिव्यांग जोड़े की शादी में अनोखा रिसेप्शन आयोजित किया गया। बंद हो चुकी संस्था ने अपने पुराने दिव्यांग कर्मचारी के लिए न केवल आयोजन किया, बल्कि 300 लोगों का परिवार खड़ा कर दिया। एक दर्जन से अधिक संस्थाओं सहित बाल कल्याण समिति, महिला बाल विकास विभाग, सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारी और उसके अंतर्गत संचालित होने वाली संस्थाएं परिवार के रूप में शामिल हुईं।

कई बार रिश्ते खून से नहीं, बल्कि संवेदनाओं से बनते हैं। शहर में ऐसा ही भावुक कर देने वाला नजारा उस समय देखने को मिला, जब वर्षों पहले बंद हो चुकी संस्था श्री युगपुरुषधाम आश्रम ने अपने पूर्व दिव्यांग कर्मचारी की शादी को यादगार बना दिया। जिन लोगों ने कभी उसे अकेला और असहाय समझा था, वे भी यह देखकर भावुक हो उठे कि उसके पीछे इतना बड़ा परिवार खड़ा है। संस्था में वर्षों तक सेवा देने वाले दिव्यांग युवक राजेश सोलंकी के विवाह अवसर पर ऐसा रिसेप्शन आयोजित किया गया, जिसने सामाजिक संवेदनशीलता की मिसाल पेश कर दी।


  • आश्रम की प्राचार्य डॉ. अनीता शर्मा और संस्था के सचिव तुलसी धनराज साजिदा ने न केवल आयोजन की जिम्मेदारी संभाली, बल्कि यह भी साबित किया कि संस्था भले बंद हो जाए, लेकिन उससे जुड़े लोगों के रिश्ते और जिम्मेदारियां खत्म नहीं होतीं। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग, सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारी, बाल कल्याण समिति के सभी सदस्य शहर की एक दर्जन से अधिक सेवाभावी संस्थाओं के प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। वर-वधू को आशीर्वाद देने पहुंचे लोगों की भीड़ देखकर कई लोग हैरान रह गए। जो युवक कभी अपनी दिव्यांगता और सीमित परिस्थितियों के कारण समाज में उपेक्षित माना जाता था, उसी के विवाह में इतना बड़ा सामाजिक परिवार खड़ा नजर आया।

    माहौल भावुक कर देने वाला था
    मंच पर जब राजेश अपनी जीवनसंगिनी के साथ पहुंचे तो तालियों की गूंज ने पूरे माहौल को आत्मीयता से भर दिया। संस्था से जुड़े लोगों ने ना सिर्फ दूल्हा-दुल्हन का स्वागत किया, बल्कि विभिन्न तरह के गेम्स आयोजित किए। यह आयोजन केवल एक विवाह समारोह नहीं था, बल्कि समाज को यह संदेश भी था कि संवेदनाएं जिंदा हों तो कोई भी व्यक्ति खुद को अकेला महसूस नहीं करता। समारोह में शहर की कई सेवाभावी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इनमें संवेदना स्पेशल स्कूल, स्वावलंबन मनोवृद्धि, संजीवनी मूक-बधिर संगठन, अदिति वृद्ध आश्रम, भिक्षुक पुनर्वास केंद्र, महेश दृष्टिहीन अरविंदो हॉस्पिटल, एबिलिटी संस्था, श्रद्धानंद मातृछाया, जीवन ज्योति, राजकीय आश्रम लोक विकास ट्रस्ट और सागर सामाजिक संस्था के पदाधिकारी शामिल रहे।

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