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वकील से बहस के बाद HC का एक्शन, रोहिणी कोर्ट के जज का तबादला

May 18, 2026

नई दिल्ली: दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में जज और वकीलों के बीच हुई तीखी बहस का मुद्दा अब विवाद बन गया है. कोर्ट रूम के अंदर दोनों के बीच गहमागहमी का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था. जिसके बाद हाई कोर्ट ने इस मामले में जज राकेश कुमार के खिलाफ एक्शन लेते हुए उनका तबादला कर दिया है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को एक अहम आदेश जारी करते हुए रोहिणी कोर्ट के जिला जज राकेश कुमार को दिल्ली ज्यूडिशियल अकादमी से अटैच कर दिया. यह फैसला उस वीडियो के सामने आने के दो दिन बाद लिया गया, जिसमें अदालत के भीतर जज और एक वकील के बीच तीखी बहस होती दिखाई दे रही थी.

बताया जा रहा है कि यह घटना 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान हुई थी. सुनवाई के समय बचाव पक्ष के वकील ने मामले में स्थगन (Adjournment) की मांग की, जिसके बाद जज और वकील के बीच तीखी नोकझोंक हो गई. बहस इस कदर बढ़ गई कि हाथापाई तक की नौबत आ गई. हालांकि इसके बाद वकीलों के भारी विरोध और हड़ताल की चेतावनी के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने विवादों में घिरे जज का ट्रांसफर करने का फैसला किया.

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में जज अपने मंच पर खड़े होकर वकील से ऊंची आवाज में बात करते दिखाई दे रहे हैं. बाद में कोर्ट स्टाफ उन्हें उनके चैंबर तक ले जाता नजर आता है.वकील ने आरोप लगाया था कि जज ने उनके साथ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया. बहस के दौरान वकील ने पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी थी. कोर्ट रूम के अंदर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था.


  • इधर मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज ने रविवार (17 मई) शाम आदेश जारी किया. जिला जज राकेश कुमार-V को अब दिल्ली ज्यूडिशियल अकादमी के निदेशक के साथ अटैच किया गया है. वहीं न्यायिक अधिकारी धीरज मित्तल को अकादमी से रोहिणी कोर्ट में जिला जज-4 के पद पर भेजा गया है. आदेश में कहा गया है कि संबंधित न्यायिक अधिकारी अपने लंबित मामलों और सुरक्षित फैसलों की जानकारी पोस्टिंग बदलने से पहले देंगे. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि लंबित निर्णयों का निपटारा अधिकतम दो से तीन हफ्ते के अंदर किया जाए.

    वहीं दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन ने इस पूरे मामले में अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को गैरकानूनी बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है. एसोसिएशन ने कहा कि वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डालना अदालतों को बदनाम करने और न्यायिक अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश है. एसोसिएशन ने दिल्ली हाईकोर्ट से मांग की है कि इस वीडियो को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने के निर्देश दिए जाएं. साथ ही उन्होंने जिला जज के ईमानदार और स्वतंत्र आचरण के समर्थन में एकजुटता भी दिखाई.

    दूसरी तरफ, दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने जज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. सभी जिला अदालत बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने इस घटना के विरोध में सोमवार को न्यायिक कार्य से दूर रहने का फैसला लिया है. हालांकि ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन ने वकीलों की इस हड़ताल का विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार ऐसी हड़तालें अवैध मानी जाती हैं.

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