ओस्लो। प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी (Narendra Modi) और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर (Jonas Gahr Støre) के बीच सोमवार को व्यापक द्विपक्षीय वार्ता हुई। बैठक में दोनों नेताओं ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों को लेकर चिंता जताई और कहा कि किसी भी संकट का समाधान युद्ध नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति से ही संभव है।
यूक्रेन और पश्चिम एशिया पर शांति का संदेश
नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्वे दोनों नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था, संवाद और कूटनीति में भरोसा रखते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चाहे मामला यूक्रेन का हो या पश्चिम एशिया का, सैन्य संघर्ष किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हर उस प्रयास का समर्थन करता रहेगा जो संघर्ष समाप्त कर शांति स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़े।
भारत-नॉर्वे रिश्तों को मिला नया आयाम
दोनों देशों ने अपने संबंधों को “हरित रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक ले जाने पर जोर दिया। Narendra Modi ने कहा कि भारत की गति, प्रतिभा और विशाल बाजार को नॉर्वे की तकनीक और पूंजी के साथ जोड़कर वैश्विक समाधान तैयार किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों की कंपनियां स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु अनुकूलन, ब्लू इकॉनमी और ग्रीन शिपिंग जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगी। प्रधानमंत्री ने इस साझेदारी को दुनिया के लिए भी लाभकारी बताया।
आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख
बैठक में आतंकवाद के मुद्दे पर भी दोनों देशों ने एकजुटता दिखाई। नरेंद्र मोदी ने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के समर्थन में खड़े होने के लिए नॉर्वे का आभार जताया।
संयुक्त बयान में दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद समेत आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के हर रूप की कड़ी निंदा की। साथ ही आतंकी संगठनों, उनके समर्थकों और वित्तपोषकों के खिलाफ समन्वित वैश्विक कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया गया।
ऊर्जा, तकनीक और शिक्षा में सहयोग बढ़ेगा
बैठक में समुद्री ऊर्जा, भूविज्ञान, स्वास्थ्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और डिजिटल टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। दोनों देशों ने विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप इकोसिस्टम को जोड़ने पर भी चर्चा की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कौशल विकास और प्रतिभाओं की आवाजाही को आसान बनाने की दिशा में भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।
आर्कटिक और अंतरिक्ष सहयोग पर जोर
Norway को आर्कटिक क्षेत्र का महत्वपूर्ण देश बताते हुए मोदी ने भारत के रिसर्च स्टेशन “हिमाद्री” के संचालन में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही Indian Space Research Organisation और नॉर्वे की अंतरिक्ष एजेंसी के बीच हुए समझौते का स्वागत किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे दोनों देशों के अंतरिक्ष सहयोग को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने हिंद-प्रशांत महासागर पहल में नॉर्वे के शामिल होने को भी महत्वपूर्ण बताया।
निवेश और रोजगार पर भी फोकस
नरेद्र मोदी ने भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच हुए व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि इसके जरिए अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश और करीब 10 लाख रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
दोनों देशों ने वैश्विक दक्षिण के देशों में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना परियोजनाओं पर साथ मिलकर काम करने के लिए त्रिपक्षीय विकास सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।
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