
नई दिल्ली । (बकरीद) (Bakrid) के त्योहार से पहले देशभर की (बकरा मंडियों) (Goat Markets) में इस समय जबरदस्त (रौनक) (Festivity) देखने को मिल रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के प्रमुख शहरों में (बाजार) (Markets) पूरी तरह सज चुके हैं। लखनऊ, भोपाल, मुंबई, प्रयागराज, पटना और झांसी जैसे शहरों की मंडियों में बड़ी संख्या में (खरीदार) (Buyers) और व्यापारी पहुंच रहे हैं। त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में हलचल लगातार बढ़ती जा रही है और खरीदारी अपने चरम की ओर बढ़ रही है।
बाजारों में बढ़ती भीड़
सुबह से लेकर देर रात तक मंडियों में लोगों की आवाजाही जारी है। अलग-अलग जिलों और गांवों से व्यापारी विशेष नस्लों के बकरे लेकर पहुंच रहे हैं। कई पशुपालकों ने पिछले कई महीनों से अपने बकरों की खास देखभाल की है ताकि त्योहार के दौरान उन्हें बेहतर कीमत मिल सके। खरीदार भी अपनी जरूरत और बजट के अनुसार बकरों का चयन कर रहे हैं। बाजारों में छोटे और सामान्य बकरों के साथ-साथ भारी वजन वाले बकरों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
महंगे बकरों की खास चर्चा
इस बार बाजारों में कुछ ऐसे बकरे भी पहुंचे हैं जिन्होंने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कई बकरों की कीमत लाखों रुपये में रखी गई है और वे चर्चा का विषय बने हुए हैं। कुछ मंडियों में 11 लाख रुपये तक कीमत वाले बकरे भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन बकरों की विशेष नस्ल, आकार और वजन उन्हें अन्य बकरों से अलग बना रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग ऐसे बकरों को देखने के लिए मंडियों में पहुंच रहे हैं।
झांसी से पहुंचे एक लगभग 125 किलो वजन वाले बकरे की भी खूब चर्चा हो रही है। इसकी कीमत करीब 3.5 लाख रुपये रखी गई है। उसका भारी शरीर और आकर्षक बनावट लोगों को प्रभावित कर रही है। मंडियों में कई लोग ऐसे विशेष बकरों के साथ तस्वीरें लेते और उन्हें करीब से देखते दिखाई दे रहे हैं।
गर्मी और महंगाई की बढ़ी चुनौती
जहां एक तरफ बाजारों में उत्साह का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ व्यापारी कई चुनौतियों का भी सामना कर रहे हैं। लगातार बढ़ती गर्मी के कारण पशुओं की देखभाल पहले से अधिक कठिन हो गई है। उन्हें सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ रही है। पशुपालकों का कहना है कि गर्म मौसम में पशुओं के खानपान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो गया है।
इसी के साथ बढ़ती महंगाई ने व्यापारियों की लागत भी बढ़ा दी है। चारे, परिवहन और रखरखाव के खर्च में लगातार बढ़ोतरी का असर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि इस बार बकरों की कीमतें पिछले वर्षों की तुलना में अधिक दिखाई दे रही हैं। इसके बावजूद बाजारों में खरीदारों का उत्साह बना हुआ है और त्योहार नजदीक आने के साथ खरीदारी में और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
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