
भागलपुर: भागलपुर और उत्तर बिहार (Bhagalpur and North Bihar) को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु पर सफर करने वाले लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर है. गंगा नदी पर बने इस ऐतिहासिक पुल के व्यापक मरम्मत और सुदृढ़ीकरण कार्य को सरकार ने मंजूरी दे दी है. करीब 126 करोड़ रुपए की लागत से सेतु का कायाकल्प किया जाएगा. परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है और जल्द ही इसके लिए टेंडर भी जारी किया जाएगा. निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित एजेंसी युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य शुरू करेगी।
126 करोड़ की लागत से होगी मरम्मत
लोक निर्माण विभाग की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत विक्रमशिला सेतु के ऊपरी ढांचे की व्यापक मरम्मत की जाएगी. पुल के जिन हिस्सों को जर्जर और क्षतिग्रस्त पाया गया है, वहां पुराने स्लैब हटाकर नए और अधिक मजबूत स्लैब लगाए जाएंगे. साथ ही पुल की संरचनात्मक मजबूती सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा.
खराब बॉल-बियरिंग बदलने के लिए लगेगा हाइड्रोलिक जैक
मरम्मत कार्य के दौरान जिन स्लैबों की बॉल-बियरिंग खराब हो चुकी है, उन्हें हाइड्रोलिक जैक की मदद से उठाकर नई बॉल-बियरिंग लगाई जाएगी. वहीं, जो स्लैब फिलहाल सुरक्षित दिखाई दे रहे हैं, उनकी भी विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी जांच की जाएगी. यदि किसी भी हिस्से में खराबी पाई जाती है तो उसकी बियरिंग भी बदली जाएगी, ताकि भविष्य में किसी तरह की तकनीकी समस्या न हो.
सामने आई IIT पटना की जांच रिपोर्ट
हाल ही में 8 और 9 जुलाई की रात IIT पटना की विशेषज्ञ टीम ने विक्रमशिला सेतु का विस्तृत तकनीकी निरीक्षण किया था. जांच के दौरान पुल के उन हिस्सों का भी मूल्यांकन किया गया, जहां पिछले रखरखाव के दौरान कार्बन प्लेट लगाई गई थीं. अब नए प्रोजेक्ट के तहत इन सभी हिस्सों की दोबारा गहन जांच कर आवश्यक मरम्मत की जाएगी.
मरम्मत के दौरान रहेगा ट्रैफिक डायवर्जन
चूंकि यह कार्य अत्यंत तकनीकी और संवेदनशील है, इसलिए मरम्मत के दौरान विक्रमशिला सेतु पर वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद रखा जाएगा. इस दौरान आम लोगों को रूट डायवर्जन और ट्रैफिक प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है. प्रशासन जल्द ही वैकल्पिक यातायात व्यवस्था की जानकारी जारी करेगा.
30 नवंबर तक काम पूरा करने का लक्ष्य
प्रशासन ने इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य तय किया है. योजना के अनुसार, 30 नवंबर तक विक्रमशिला सेतु की मरम्मत पूरी कर इसे फिर से सुरक्षित और सुचारु रूप से यातायात के लिए खोल दिया जाएगा. इसके बाद उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच यह महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग पहले से अधिक सुरक्षित और मजबूत होकर लोगों की सेवा में उपलब्ध रहेगा.
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