
- मानसिक बीमारी से पीडि़त मरीजों को मिल रहा केवल प्राथमिक उपचार
उज्जैन। जिले सहित पूरे प्रदेश में मानसिक रोग विशेषज्ञों की कमी बनी हुई हैं। उज्जैन स्वास्थ्य विभाग की बात करे तो यहाँ एक भी मनो रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। ऐसे में डिग्रीधारी मनो चिकित्सक ही विशेषज्ञ का पद और काम संभाल रहे हैं। नतीजतन, मानसिक पीडि़तों को इलाज के लिए प्रायवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ा रहा है।
उल्लेखनीय है कि उज्जैन शहर में चरक अस्पताल, माधव नगर अस्पताल के अलावा 9 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहे हैं। बावजूद, मानसिक रोगियों के इलाज देने के लिए एक भी मानसिक रोग विशेषज्ञ का पद स्वीकृत नहीं है। यह स्थिति पिछले कई सालों से बनी हुई हैं और अब तक सरकारी अस्पतालों में मानसिक चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी, वहीं यहाँ उपचार के नाम पर मानसिक बीमारी से पीडि़त मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार मिल रहा है। नतीजतन, मानसिक रोगियों को इलाज कराने के लिए प्रायवेट अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। मामले में चरक अस्पताल में मनोरोग विभाग के चिकित्सक डॉ. नितराज गौड़ ने बताया कि उज्जैन ही नहीं पूरे प्रदेश में सरकारी अस्पतालों में मनो रोग विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है। जबकि मानसिक विकार गंभीर समस्या है। समय रहते ध्यान न दिया जाय को स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक असर होता है। स्ट्रेस-एंग्जाइटी के साथ शुरू होने वाली यह परेशानी डिप्रेशन अवसाद का रूप ले लेती है। युवा बहुत जल्द अवसाद के चपेट में आ रहे हैं। इससे बचाने के लिए स्ट्रेस एंग्जाइटी को कंट्रोल करना जरूरी है। बता दें कि चरक भवन में मरीजों की संख्या हर साल बढ़ रही हैं लेकिन स्टॉफ की संख्या जरूरत की आधे भी नहीं बढ़ी है। इससे मरीजों के इलाज से लेकर देखरेख मुश्किल होती जा रही है। स्थिति यह है कि यहां जितने पद स्वीकृत हैं, उन सभी पर तैनाती भी नहीं है। समय से साथ शासन की जारी योजनाओं के तहत बेड बढ़ते गए लेकिन डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट व वार्ड बॉय कम होते गए। यह स्थिति पिछले दस सालों से बनी हुई है।