
इंदौर। निगम सीमा में शामिल 85 वार्डों में से 75 वार्डों में इन दिनों जलसंकट देखने को मिल रहा है। वहीं कई वार्डों में तो स्थिति भीषण है, जिसके चलते मटके फूटने, चक्काजाम करने से लेकर रोजाना ही रहवासियों का गुस्सा जनप्रतिनिधियों और निगम के खिलाफ फूट रहा है। दूसरी तरफ पिछले दिनों लाशों को छुपाने में इस्तेमाल होने वाले नीले ड्रम की राष्ट्रीय स्तर पर कुख्याती हुई और मीडिया से लेकर चैनलों की सुर्खियों में ये नीले ड्रम रहे, जिसे लेकर खूब रील मीम्स भी बने। अब यही नीले ड्रम इन दिनों इंदौरियों की जीवन रेखा साबित हो रहे हैं।
इन दिनों भीषण जलसंकट के चलते लोगों को टैंकरों या एक दिन छोडक़र आने वाले नर्मदा के पानी को भरकर रखना पड़ता है, जिसमें ये नीले ड्रम सबसे अधिक सहायक साबित हो रहे हैं, जो भरने में आसान और कम वजनी होने के चलते इन्हें ढोकर ले जाने भी आसान है। गली-मोहल्ले, कॉलोनियों में नीले ड्रम बड़ी संख्या में इस्तेमाल हो रहे हैं और जिंसी बाजार से लेकर अन्य जगह इन नीले ड्रमों की बिक्री भी अधिक हो रही है कि इनकी आपूर्ति भी नहीं हो पा रही है। एक हजार से अधिक ड्रम रोजाना बिक रहे हैं और दुकानदारों का कहना है कि वैसे तो हर गर्मी में इनकी मांग बढ़ती है, मगर इस बार तीन से चार गुना तक ये नीले ड्रम बिक रहे हैं, क्योंकि भीषण गर्मी के साथ इस बार जलसंकट भी ज्यादा है। 700-800 रुपए से लेकर हजार रुपए वाले ये ड्रम और भी महंगे हो गए। इतना ही नहीं, आसपास के शहरों में भी इन ड्रमों की मांग बढ़ गई, जिसके चलते इंदौर के ही व्यापारी इन ड्रमों की सप्लाय प्रदेशभर में कर रहे हैं। पहले ये ड्रम मुंबई या अन्य शहरों से आते थे।
मगर अब पीथमपुर में जो दवाई, केमिकल या अन्य फैक्ट्रियां हैं उनमें रॉ मटेरियल भरकर ये ड्रम आते हैं। खाली होने के बाद इन ड्रमों को बाजार में बेचने के लिए उपलब्ध करा दिया जाता है। इन ड्रमों का इस्तेमाल गर्मियों में जहां पानी भरने के लिए, तो उसके बाद अनाज या अन्य सामग्री भरने में भी इस्तेमाल किया जाता है। अभी नगर निगम के टैंकर पानी लेकर जिन गलियों-मोहल्लों और कॉलोनियों में पहुंचते हैं, वहां इन नीले ड्रमों की कतार नजर आती है। कई परिवारों ने दो से चार ड्रम तक खरीदकर रख लिए, क्योंकि इसमें काफी पानी एकत्रित हो जाता है और दो ड्रम भी एक परिवार के लिए पर्याप्त साबित होता है। इसके अलावा ये ड्रम हलवाइयों से लेकर केटरिंग व्यवसाइयों द्वारा भी खाना बनाने, पानी भरने में इस्तेमाल किया जाता है। इस बार मांग बढऩे के कारण 20 से 25 फीसदी तक ये नीले ड्रम महंगे भी हो गए हैं। दूसरी तरफ घरभर में जो जलसंकट है वह तो कायम है ही, वहीं लगभग 75 वार्ड अधिक जलसंकट का सामना कर रहे हैं, जिसके कारण लगभग रोजाना ही तीखा विरोध-प्रदर्शन हो रहा है। महापौर और आयुक्त लगातार जल वितरण व्यवस्था पर निगाह भी हो रखे हैं और पानीकी टंकियों की भी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही।
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