
नई दिल्ली। कर्नाटक (Karnataka) के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) का दिल्ली दौरा कांग्रेस के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि वह राज्य की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी भूमिका निभाएं। इसी सिलसिले में राहुल गांधी और सोनिया गांधी उनसे मुलाकात करेंगे।
दरअसल, कांग्रेस नेतृत्व सिद्धारमैया को पार्टी का सबसे मजबूत OBC चेहरा मानता है। पार्टी की रणनीति है कि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें दिल्ली की राजनीति में सक्रिय कर संगठन और पिछड़े वर्गों के बीच पकड़ मजबूत की जाए। सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी पहले भी उनसे राज्यसभा जाने और दिल्ली में अहम जिम्मेदारी संभालने को लेकर चर्चा कर चुके हैं।
दिल्ली जाते समय खराब मौसम के कारण सिद्धारमैया का विमान जयपुर में उतारना पड़ा, जिसके चलते गुरुवार रात की प्रस्तावित बैठक टल गई। अब राहुल गांधी और सिद्धारमैया के बीच शुक्रवार सुबह बैठक होने की संभावना है। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी उनकी मुलाकात तय मानी जा रही है। सिद्धारमैया के साथ AICC महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, मंत्री के.जे. जॉर्ज, बयरती सुरेश, कानूनी सलाहकार पोन्नान्ना, विधान परिषद सदस्य डॉ. यतींद्र और AICC सचिव अभिषेक दत्त भी मौजूद रहे।
कर्नाटक में बदला नेतृत्व
गुरुवार को कर्नाटक की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला पार्टी हाईकमान के निर्देश पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि पहले ही तय था कि पार्टी जब कहेगी, वह पद छोड़ देंगे।
इस्तीफा राज्यपाल की अनुपस्थिति में उनके सचिव को सौंपा गया। इसके बाद राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हालांकि, राष्ट्रीय राजनीति में जाने की अटकलों पर सिद्धारमैया ने फिलहाल साफ संकेत नहीं दिए। उन्होंने कहा कि उन्हें राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन वह कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहना चाहते हैं।
सरकार के कामकाज का किया बचाव
पद छोड़ने के बाद सिद्धारमैया ने अपनी सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की गारंटी योजनाओं को लेकर विपक्ष ने कई सवाल उठाए, लेकिन राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में कर्नाटक देश में शीर्ष पर है और GST संग्रह में भी राज्य अग्रणी राज्यों में शामिल है। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार ने कानूनी सीमा के भीतर ही कर्ज लिया और चुनावी वादों का अधिकांश हिस्सा पूरा किया।
सिद्धारमैया ने बताया कि कांग्रेस की पांच गारंटी योजनाओं पर अब तक 1.40 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर राज्य को मिलने वाली वित्तीय सहायता रोकने का आरोप भी लगाया। सरकार की स्थिरता को लेकर उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा कि कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है और सिर्फ मुख्यमंत्री का चेहरा बदलेगा, सरकार नहीं।
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