
इंदौर। एक तरफ पुलिस पर कई आरोप लगते हैं, तो दूसरी तरफ अदालतों ने भी कड़ी टिप्पणियां की हैं। वहीं अब पुलिस की कार्यप्रणाली डिजिटल करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस कमिश्रर संतोष सिंह इस कार्य में जुटे हैं। अभी तक शहर के सभी थानों के विवेचना अधिकारियों को 873 टेबलेट बांटे जा चुके हैं। इनके माध्यम से डिजिटल साक्ष्य यानी सबूतों का संकलन किया जाना, साइबर सुरक्षा, ई-केस डायरी सहित तस्वीरें-वीडियो, डिजिटल साक्ष्यों को सीधे अपलोड करने की सुविधा मिलेगी।
अभी तक पुलिस का काम डायरी लिखने, कागजी कार्रवाई और एफआईआर तक पहले हाथ से लिखी जाती थी। इसके बाद ई-एफआईआर का भी चलन शुरू हुआ और ऑनलाइन शिकायतें भी की जाने लगी। सूचना प्रौद्योगिकी और आधुनिकीकरण के चलते पुलिस मुख्यालय ने भी कई तरह के साधन-संसाधन, उपकरण दिए हैं, तो स्थानीय स्तर पर कमिश्रर द्वारा भी टेबलेट वितरण से लेकर कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई। शहर के प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे, ई-चालान, वाहनों की रफ्तार पर नियंत्रण के लिए राडार मशीनें, रोजाना होने वाली चैकिंग में भी बॉडी वॉर्म कैमरे, ब्रीथ एनालाइजर मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे रोजाना ही शराब पीकर वाहन चलाने वालों की धरपकड़ होती है।
कमिश्रर संतोष सिंह ने आपराधिक मामलों की जांच पड़ताल को और अधिक प्रमाणिक बनाने, सबूतों को दर्ज करने, केस रिकॉर्ड तैयार करने और सभी जानकारियों को डिजिटल प्रूफ में अपलोड करने में सक्षम बनाना शुरू किया है। लगातार टेबलेट भी वितरित किए जा रहे हैं। पूर्व में 176 टेबलेट बांटे गए थे। इसके बाद अभी 697 नए टेबलेट और वितरित किए गए। इस तरह अभी तक कुल 873 टेबलेट इंदौर पुलिस को मिल चुके हैं। शहरभर के पुलिस थानों में तैनात विवेचना अधिकारियों को इन टेबलेट की मदद से डिजिटल साक्ष्य एकत्रित करने में मदद मिलेगी। सीसीटीवी कैमरों से हासिल होने वाले फुटेज, मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किए गए, लोकेशन डेटा सहित अन्य साक्ष्य संरक्षित करने में भी ये टेबलेट मददगार रहेंगे।
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