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ये पॉलिटिक्स है प्यारे

June 01, 2026

सीएम के कटाक्ष पर कांग्रेस हुई हमलावर
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को शुजालपुर में पटवारी को लेकर जो कटाक्ष किए उसने सीधे सोए हुए कांग्रेसियों को बड़ा राजनीतिक मुद्दा दे दिया है। मुख्यमंत्री ने पटवारी पर सीधे हमला बोला और उन्हें दो कौड़ी, टपोरी और न जाने क्या-क्या कह दिया। जाहिर है कांग्रेस चुप रहने वाली नहीं है। जिस तरह से वर्तमान में कांग्रेस में जो दम भरा जा रहा है, उसने तो मुख्यमंत्री के बयान को आग में घी डालने का काम कर दिया है। अब कांगे्रस ने कल मुख्यमंत्री के पुतले जलाए, लेकिन कल सोशल मीडिया पर उन्होंने मुख्यमंत्री को न केवल ट्रोल किया और भी बहुत कुछ कह दिया। कुछ सोते हुए कांग्रेसी को मौका मिला और उन्होंने भी जीतू पटवारी की नजर में चढऩे के लिए बयान पर बयान जारी कर दिए। कांग्रेसियों को देखकर नहीं लग रहा है कि ये लड़ाई यहां थमने वाली नहीं है। भाजपाई भी फिर कहां चुप बैठने वाले हैं, उन्होंने भी कांग्रेसियों को अपनी स्टाइल में जवाब देने की तैयारी कर ली है।


  • शिवराज से मोह अभी नहीं छूटा
    पिछले सप्ताह केन्द्रीय मंत्री शिवराजसिंह चौहान ने दिल्ली में एक पुस्तक का विमोचन कराया। जाहिर है एमपी के नेताओं को भी न्योता दिया होगा, लेकिन सबसे पहली लाइन में दो ही चेहरे चमक रहे थे। एक था विधायक गोलू शुक्ला का तो दूसरा जीतू जिराती का। शुक्ला यूं भी शिवराज के अतिप्रिय गणों में रहे हैं तो जीतू जिराती राजनीति में अपने नए मुकाम की तलाश कर रहे हैं। हालांकि कुछ नेता शिव का गण होने के बावजूद नहीं गए, क्योंकि उन्हें मालम है कि अभी प्रदेश में शिवराज नहीं, बल्कि मोहनराज है और अगर मोहन का मोह भंग हो गया तो नाराजगी फूट सकती है।

    हमारे बड़े भैया नेता हैं तो फिर काहे का डर
    भाजपा के कुछ नेताओं ने पार्टी का नाम मिट्टी में मिलाने की ठान ली है। नेताओं की किस तरह की गुंडागर्दी चल रही है, उसका उदाहरण जूनी इंदौर क्षेत्र में देखने को मिला। यहां एक मंडल पदाधिकारी के भाई को लोगों ने उस समय पकड़ लिया, जब वह आधी रात को मोहल्ले के एक घर में ताकझांक कर रहा था। उसे पुलिस के हवाले कर दिया ओर सीसीटीवी फुटेज भी दे डाले, जिसमें घटना कैद हुई है। बताते हैं कि आए दिन वह इसी तरह लोगों को परेशान करता है और भाजपा का पदाधिकारी बना उसका बड़ा भाई उसे छुड़ा लेता है।

    सांस्कृतिक कार्यक्रम के बहाने ले लिए मोबाइल
    भाजपा के प्रशिक्षण वर्ग में मोबाइल अंदर ले जाना प्रतिबंधित था। कारण कई नेता तो रील को देखकर टाइम पास करते तो कुछ ऐसी वीडियो बना लेते, जो बाहर नहीं आना चाहिए। ऐसा ही एक वीडियो मंडल के प्रशिक्षण वर्ग के दौरान बाहर आ गया था, जिसमें एक एमआईसी मेम्बर फिल्मी गीतों पर ठुमके लगाते दिख रहे थे। इसको लेकर खूब किरकिरी भी हुई। प्रदेश से ही मोबाइल बाहर रखवाने के निर्देश थे। सुबह तक तो सबकुछ ठीक रहा, लेकिन बाद में एक-एक कर बड़े नेताओं के हाथों में मोबाइल नजर आने लगा। अब मोबाइल लॉकर में रखने वाले बड़े नेताओं से दुश्मनी तो मोल नहीं ले सकते। शाम को जब सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए तो नेताओं के साथ पदाधिकारियों के हाथों में भी मोबाइल थे। किसी ने गाने गाए तो किसी ने भजन, लेकिन अभी तक किसी के वीडियो बाहर नहीं आए हैं।

    शैलेष ने बोल दिया- सब मटके फोड़ डालो
    पानी को लेकर राजबाड़ा पर हुए कांग्रेस के आंदोलन में अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष दोनों में ही कम्युनिकेशन की कमी नजर आई। बड़े नेताओं के भाषण हो जाने के बाद जब सभी नगर निगम की ओर जाने लगे तो चिंटू चौकसे ने कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान को देखते हुए केवल एक मटका प्रतीकात्मक तौर पर निगम के गेट पर फोड़ेंगे, लेकिन उनके बाद शैलेष गर्ग ने बोल दिया कि सब मटके फोड़ डालो, कम पड़े तो गांधी भवन से व्यवस्था की गई है। बस फिर क्या था, कार्यकर्ताओं ने फोटोबाजी के चक्कर में निगम के गेट पर मटके फोडक़र कचरा कर डाला, जिसकी चिंटू को आशा नहीं थी।

    चार नंबर में कांग्रेस के पास दमदार नाम नहीं
    जिस तरह से कांग्रेस आने वाले चुनाव की तैयारी कर रही है, उससे अब उन नेताओं को चुना जा रहा है, जो विधानसभा स्तर पर अपना दम दिखा सके। कांग्रेस के पास चार नंबर में ऐसा कोई मजबूत नाम नहीं है, जिसको लेकर निर्णय लिया जा सके। सुरजीतसिंह चड्ढा चुनाव हार चुके हैं और शहर अध्यक्ष रहते हुए भी उनके खाते में कोई बड़ी उपलब्धि नहीं रही। यूं भी उनकी चिंटू से बनती नहीं है। दूसरे देवेन्द्रसिंह यादव हैं, लेकिन वे भी आंदोलन और धरने तक सीमित हैं। इसके अलावा अभी तक कोई बड़ा नाम चार नंबर में सामने निकलकर नहीं आ रहा है। हो सकता है चुनाव तक कोई चमत्कार हो जाए।

    गांधी भवन में अनुशासन, पूछपरख भी बढ़ी
    एक समय गांधी भवन में व्यवस्था संभालने के लिए गिने-चुने लोग होते थे, लेकिन अब चिंटू चौकसे के अध्यक्ष बनने के बाद कार्यालय में अनुशासन दिखाई देने लगा है। बकायदा यहां व्यवस्था के लिए कर्मचारी बढ़ाए गए हैं। सबकी एक जैसी ड्रेस बनाई गई है, ताकि वे अलग दिख सके। कार्यालय में कार्यकर्ताओं की पूछपरख भी बढ़ते जा रही है, जहां कभी कुछ लोगों का ही राज होता था।

    सुमित मिश्रा स्टंट डलवाने के बाद भी चुप नहीं बैठ रहे हैं। उनके नजदीकियों ने उन्हें घर पर एक महीने आराम करने की सलाह दी है और डॉक्टर को पहले ही अपने प्रिसक्रिप्शन में आराम करने का कह चुके हैं, लेकिन सुमित अभी भी नहीं मान रहे हैं। घर वालों ने वैसे सुमित पर लगाम लगाकर उन्हें अपने कमरे में बंद कर दिया और मिलने वालों से भी कम मिलने दिया जा रहा है, लेकिन सुमित तो सुमित ठहरे। घर में बैठे-बैठे ही वे मोबाइल से अपनी पार्टी चला रहे हैं। -संजीव मालवीय

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