कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति (Politics of West Bengal) में एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने संघर्ष, मेहनत और बदलाव की नई मिसाल पेश की है। कभी लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा और सफाई (Sweeping and Cleaning) का काम कर गुजारा करने वाली कलिता माझी (Kalita Majhi) अब राज्य सरकार में मंत्री (Minister in State Government) बन गई हैं। बूथ स्तर की कार्यकर्ता के तौर पर राजनीति शुरू करने वालीं माझी ने सोमवार को मंत्री पद की शपथ ली।
उनकी यह यात्रा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने राजनीति में अपनी पहचान बनाई। बताया जाता है कि चुनाव लड़ने से पहले वह कई घरों में घरेलू काम कर परिवार चलाती थीं और उनकी मासिक आय करीब 2500 रुपये थी।
सादगी बनी पहचान
मंत्री पद की शपथ के दौरान भी कलिता माझी ने अपनी सादगी नहीं छोड़ी। चर्चा है कि समारोह में वह कोई नई या महंगी साड़ी पहनकर नहीं पहुंचीं, बल्कि अपनी कमाई से वर्षों पहले खरीदी गई पुरानी साड़ी में ही शपथ लेने आईं। इससे पहले विधायक पद की शपथ के दौरान उन्होंने वह साड़ी पहनी थी, जो कथित तौर पर उन्हें उस परिवार ने उपहार में दी थी, जहां वह घरेलू काम करती थीं।
परिवार जैसा रिश्ता, आज गर्व महसूस कर रहे लोग
प्लातिलाल पात्रा का परिवार, जिनके घर में कलिता वर्षों तक काम करती रहीं, आज उनकी उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है। परिवार का कहना है कि कलिता उन्हें हमेशा अपनेपन से ‘काका’ और ‘बाबा’ कहकर बुलाती थीं। उन्हें उम्मीद है कि मंत्री बनने के बाद वह आम लोगों की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझेंगी और विकास के लिए काम करेंगी।
मंत्री बनने के बाद क्या बोलीं?
शपथ ग्रहण के बाद कलिता माझी ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका जीवन इस तरह बदल जाएगा। उन्होंने अपनी पार्टी का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें हर स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि विधायक रहते हुए उनका ध्यान अपने क्षेत्र के विकास पर था, लेकिन अब जिम्मेदारी पूरे राज्य के प्रति है। माझी ने यह भी कहा कि वे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में काम करेंगी, क्योंकि वे खुद ऐसे संघर्षों को करीब से जानती हैं।
संघर्ष के बीच चुनावी जीत
पूर्वी वर्धमान जिले की औसग्राम सीट से चुनाव लड़कर कलिता माझी ने सभी को चौंका दिया था। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने चुनाव में जीत दर्ज की और राजनीति में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। उनके पति प्लंबर हैं और परिवार साधारण जीवन जीता है। माझी अपने बेटे को भी चुनावी अभियान की सफलता का बड़ा श्रेय देती हैं।
कलिता माझी की कहानी अब पश्चिम बंगाल में मेहनत और संघर्ष से बदलाव की मिसाल के तौर पर देखी जा रही है।
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