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किसानों की अपनी मजबूरी इसलिए समर्थन मूल्य से बनाई दूरी

June 08, 2026

  • 50,780 किसानों ने कराया था पंजीयन, लेकिन खरीदी केंद्रों तक पहुंचे सिर्फ 34,660

जबलपुर। जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का अभियान समाप्त हो चुका है, लेकिन आंकड़े कई सवाल भी खड़े कर रहे हैं। इस वर्ष गेहूं विक्रय के लिए पंजीयन कराने वाले 50 हजार 780 किसानों में से करीब 16 हजार किसान खरीदी केंद्रों तक पहुंचे ही नहीं। माना जा रहा है कि इन किसानों ने अपनी उपज कृषि उपज मंडियों या खुले बाजार में व्यापारियों को बेच दी। खाद्य विभाग के अनुसार रबी विपणन वर्ष 2026-27 में जिले के 34 हजार 660 किसानों से कुल 25 लाख 89 हजार क्विंटल गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदा गया।



  • विभाग का दावा है कि पिछले पांच वर्षों में किसान संख्या के लिहाज से यह सबसे बड़ा उपार्जन है। सरकार द्वारा इस वर्ष किसानों से 40 रुपये बोनस सहित 2,625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा गया। खरीदी गई उपज के एवज में अब तक 553 करोड़ रुपये किसानों के खातों में भेजे जा चुके हैं, जबकि करीब 126 करोड़ रुपये का भुगतान अभी शेष है।

    पंजीयन ज्यादा, खरीदी कम
    खाद्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 50,780 किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया था। इनमें से 36,948 किसानों ने स्लॉट बुक किए, लेकिन अंतत: केवल 34,660 किसानों ने ही केंद्रों पर गेहूं बेचा। यानी बड़ी संख्या में किसानों ने अंतिम समय में सरकारी खरीदी प्रक्रिया से दूरी बना ली।

    परिवहन और भंडारण लगभग पूरा
    अधिकारियों के मुताबिक खरीदे गए गेहूं की 99.6 प्रतिशत मात्रा का परिवहन किया जा चुका है, जबकि 94.1 प्रतिशत मात्रा को संबंधित एजेंसियों द्वारा स्वीकृत भी कर लिया गया है। इससे भंडारण और वितरण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।

    गड़बडिय़ों पर भी उठे सवाल
    हालांकि गेहूं खरीदी के दौरान जिले के कई केंद्रों से अनियमितताओं और गड़बडिय़ों की शिकायतें भी सामने आईं। कहीं किसानों को स्लॉट और तौल के लिए इंतजार करना पड़ा तो कहीं गुणवत्ता परीक्षण को लेकर विवाद हुए। इसके बावजूद प्रशासन इसे जिले का सबसे सफल खरीदी अभियान बता रहा है।खाद्य विभाग का कहना है कि खरीदी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराई गई है और शेष भुगतान भी जल्द किसानों के खातों में जमा करा दिया जाएगा।

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