
आगर मालवा (मनीष मारू)। जनवरी 2026 में राजस्थान के झालावाड़ जिले के घाटाखेड़ी गांव में की गई आगर कोतवाली पुलिस की चर्चित एनडीपीएस कार्रवाई अब कानूनी शिकंजे में आ गई है। चौमहला न्यायालय के आदेश पर राजस्थान के डग थाने में सोमवार रात आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूप सिंह राजपूत, उप निरीक्षक राखी गुर्जर, एएसआई अजय जाट, राहुल विश्वकर्मा, पुलिसकर्मी शुभम सहित अन्य 90 अज्ञात व्यक्तियों एवं पुलिसकर्मियों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद मध्यप्रदेश पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
न्यायालय में रखे गए तकनीकी साक्ष्य
11 जून को परिवादी हमीद खान की ओर से अधिवक्ताओं ने न्यायालय में विस्तृत बहस की। उन्होंने तर्क दिया कि एनडीपीएस जैसी गंभीर कार्रवाई में स्थानीय पुलिस को सूचना नहीं देना, स्वतंत्र गवाहों को आगर से साथ ले जाना, तलाशी और जब्ती की वीडियोग्राफी नहीं करना तथा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करना कार्रवाई को संदिग्ध बनाता है। न्यायालय में प्रस्तुत सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह भी बताया गया कि मध्यप्रदेश पुलिस के वाहन घाटाखेड़ी में लगभग 30 मिनट ही रुके थे। इसी अवधि में तलाशी, गिरफ्तारी, जब्ती और अन्य समस्त कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया, जबकि इतने कम समय में एनडीपीएस अधिनियम के तहत संपूर्ण प्रक्रिया पूरी होना संभव नहीं प्रतीत होता। अधिवक्ताओं ने यह भी तर्क रखा कि जब्ती का जो समय दस्तावेजों में दर्शाया गया है, उस समय पुलिस दल राजस्थान की सीमा में मौजूद ही नहीं था। साथ ही परिवादी द्वारा लगाए गए आरोपों को तकनीकी साक्ष्यों से समर्थन मिलने की बात भी न्यायालय के समक्ष रखी गई।
आदेश के बाद दर्ज हुई एफआईआर
जांच रिपोर्ट और प्रस्तुत तर्कों पर विचार करने के बाद चौमहला न्यायालय ने संबंधित पुलिस अधिकारियों एवं अन्य लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश जारी किए थे। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में डग थाने में सोमवार रात विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया। सूत्रों के अनुसार एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले को लेकर पुलिस विभाग में हलचल बढ़ गई है तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर मंथन जारी है। वहीं इस कार्रवाई को लेकर अब दोनों राज्यों में व्यापक चर्चा हो रही है। उल्लेखनीय है कि जनवरी में हुई इस कार्रवाई को आगर पुलिस ने बड़ी सफलता के रूप में प्रस्तुत किया था, लेकिन अब न्यायालय के आदेश और दर्ज एफआईआर के बाद पूरी कार्रवाई की निष्पक्षता, वैधता और प्रक्रिया को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
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