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तिब्बत में चीन का मेगा डैम प्रोजेक्ट: ब्रह्मपुत्र पर मंडराया संकट, भारत ने बढ़ाई निगरानी

June 17, 2026

तिब्बत ।  तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी(Yarlung Tsangpo River) पर चीन(China) द्वारा दुनिया के सबसे बड़े जलविद्युत बांध के निर्माण को आगे बढ़ाए जाने से भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारतीय सीमा(Indian border) के अपेक्षाकृत निकट स्थित है और इसका सीधा प्रभाव ब्रह्मपुत्र नदी(Brahmaputra River) के जल प्रवाह पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस परियोजना का संचालन पूरी तरह चीन के नियंत्रण में रहा, तो निचले बहाव वाले क्षेत्रों में जल प्रबंधन, पर्यावरण और कृषि से जुड़ी कई नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

यारलुंग त्सांगपो नदी तिब्बत से निकलकर भारत में अरुणाचल प्रदेश के रास्ते प्रवेश करती है, जहां इसे सियांग नदी के नाम से जाना जाता है। आगे चलकर यही नदी असम में ब्रह्मपुत्र का विशाल स्वरूप धारण करती है। करोड़ों लोगों की आजीविका, कृषि, मत्स्य पालन और पेयजल की जरूरतें इस नदी पर निर्भर हैं। ऐसे में ऊपरी धारा में किसी बड़े निर्माण का प्रभाव निचले क्षेत्रों तक महसूस किया जा सकता है।

चीन का कहना है कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और जलविद्युत क्षमता का विस्तार है। बीजिंग का दावा है कि बांध से पर्यावरणीय नुकसान को न्यूनतम रखने का प्रयास किया जाएगा और इससे क्षेत्र के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि भारत में कई विशेषज्ञ और नीति विश्लेषक इस दावे को सावधानी से देखने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े स्तर की परियोजना नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञों की सबसे बड़ी चिंता जल प्रवाह के नियंत्रण को लेकर है। यदि भविष्य में किसी कारणवश नदी के पानी के बहाव में बदलाव किया जाता है या जल संग्रहण की मात्रा बढ़ाई जाती है, तो इसका असर अरुणाचल प्रदेश और असम में दिखाई दे सकता है। इससे कृषि उत्पादन, नदी तटों की संरचना और स्थानीय जैव विविधता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा अचानक अधिक पानी छोड़े जाने की स्थिति में बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है।

भारत सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। सरकार ने संसद में भी स्पष्ट किया है कि सीमा पार नदियों से जुड़ी सभी गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। भारत ने चीन के साथ विभिन्न कूटनीतिक माध्यमों से यह मुद्दा उठाया है और सीमा पार नदी परियोजनाओं में पारदर्शिता, डेटा साझाकरण तथा पूर्व सूचना व्यवस्था पर जोर दिया है।


  • इसके साथ ही भारत पूर्वोत्तर राज्यों में अपनी तैयारियों को भी मजबूत कर रहा है। बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली, नदी निगरानी नेटवर्क, जल संसाधन प्रबंधन और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को आधुनिक बनाया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि किसी भी संभावित जोखिम की स्थिति में समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

    विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा केवल जल संसाधनों तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले वर्षों में भारत और चीन के बीच सीमा पार नदियों को लेकर संवाद और पारदर्शिता की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है। फिलहाल, चीन की इस विशाल परियोजना पर भारत की नजर बनी हुई है और सरकार संभावित प्रभावों का आकलन करने में जुटी हुई है।

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