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वीरान होता उज्जैन जंक्शन.. 400 इंजन ड्रायवरों को बाहर भेजा

June 18, 2026

  • धीरे-धीरे रेलवे उज्जैन से हटा रहा है स्टाफ
  • लोकल गाडिय़ों का ही स्टाफ रह गया उज्जैन में

उज्जैन। एक समय था जब उज्जैन रेलवे स्टेशन पर सुविधाएँ बढ़ रही थी तथा सिंहस्थ की दृष्टि से भी योजनाएँ बन रही थी लेकिन अब उल्टा हो रहा है और उज्जैन जंक्शन को धीरे-धीरे वीरान किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में उज्जैन रेलवे स्टाफ से 400 रेलवे कर्मियों को हटा दिया गया तथा बाहर भेजा गया।



  • मिली जानकारी के अनुसार उज्जैन में अब आसपास की लोकल गाडिय़ों के ड्राइवर और स्टफ के मेंबर ही रहते हैं। एक समय था जब स्टेशन से लगी विवेकानंद कॉलोनी में अधिकांश रेलवे कर्मचारी तथा उनका परिवार रहते थे और इस कॉलोनी में किराये से मकान नहीं मिलते थे लेकिन आज हालात यह हैं कि रेलवे के कर्मचारियों को उज्जैन से बाहर भेजने के बाद हजारों लोगों को जाना पड़ा और कालोनियों में मकान खाली पड़े हैं और कोई किराए से लेने वाला नहीं है। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार रेलवे धीरे-धीरे करके उज्जैन जंक्शन को पूरी तरह से केवल ट्रेनों के गुज़रने का स्थान बनाना चाहता है जबकि यहाँ पहले प्रशिक्षण केंद्र सहित लोको के अन्य कार्य भी होते थे। पिछले कुछ महीने में उज्जैन जंक्शन से 400 रेलवे के ड्राइवर तथा सहायक ड्राइवरों को ट्रांसफर कर बाहर भेज दिया गया है। अधिकांश को इंदौर भेजा गया है जबकि उज्जैन में पचास ड्राइवर बचे हैं जिन्हें लोकल ट्रेन के लिए रखा गया है। सवाल यह उठता है कि सिंहस्थ नजदीक है और ऐसे में रेलवे के आला कमान की क्या मंशा है। बताया जा रहा है कि सिंहस्थ के समय दो तीन महीने के लिए अतिरिक्त स्टाफ उज्जैन में बुला दिया जाएगा लेकिन इसके बाद उज्जैन जंक्शन की हालत सामान्य स्टेशन जैसी हो जाएगी। यह आश्चर्य की बात है कि कई बड़े स्तर के जन प्रतिनिधि उज्जैन में है लेकिन वे इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जबकि पूर्व में लोको पायलट तथा अन्य कर्मियों ने इसे लेकर ज्ञापन भी दिया और उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। पिछले कुछ महीनों में रेलवे के 400 चालकों का ट्रांसफर होने से शहर की अर्थव्यवस्था भी खराब हुई है तथा उनके परिवार यहाँ रहते थे तो उनसे व्यवसाय भी होता था। विवेकानंद कॉलोनी के निवासियों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से मकान किराये से लेने लोग नहीं आ रहे हैं और कई मकान खाली पड़े हुए हैं। आखिर यह सब किसके निर्देश पर हो रहा है तथा मुख्यमंत्री को इस संबंध में संज्ञान लेना चाहिए कि उज्जैन रेलवे जंक्शन का धीरे-धीरे स्टाफ क्यों कम किया जा रहा है, इससे आने वाले समय में उज्जैन रेलवे स्टेशन पर सुविधाएँ कम होंगी और यात्रियों को परेशानी होगी। यह उल्लेखनीय है कि रेलवे द्वारा नए ड्राइवरों की भर्ती नहीं की जा रही है तथा आउटसोर्स ठेके पर रेलवे परिचालन की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है जोकि जनता विरोधी व्यवस्था है व्यवस्था है।

    विवेकानंद कॉलोनी में खाली पड़े हैं क्वाटर
    रेलवे स्टेशन से सटी विवेकानंद नगर कॉलोनी शहर की प्रमुख कॉलोनी है जिसमें हजारों लोग रहते हैं और यहाँ मकानों के दाम अधिक हैं, क्योंकि रेलवे के सैकड़ों परिवार इस कॉलोनी में किराये से रहते थे। कारण यह था कि स्टेशन से नजदीक होने के कारण रेल कर्मियों को सुविधा होती थी। 400 ड्राइवरों का स्टाफ हटाने से उनके परिवार वाले भी उज्जैन से चले गए और इस कॉलोनी में भी अब किरायेदारों की कमी हो गई है, क्या इसे उज्जैन का विकास कहा जाएगा?

    पूछताछ केन्द्र भी प्राइवेट ठेके पर दिया..
    शहरवासियों को शायद पता नहीं है कि उज्जैन रेलवे स्टेशन पर एक नंबर प्लेटफॉर्म से लगा पूछताछ केंद्र भी प्राइवेट ठेके पर दे दिया है और वहाँ ठेकेदार के कर्मचारी व्यवस्था संभाल रहे हैं, जबकि सालों से रेलवे कर्मचारी ही पूछताछ केंद्र का संचालन करते थे। यह जानकारी सामने आई है कि धीरे-धीरे उज्जैन की अन्य सुविधाओं को भी रेलवे द्वारा प्राइवेट ठेकेदारों को दिया जा रहा है। जाहिर है ऐसा होने से आम यात्रियों को असुविधा होगी, क्योंकि निजीकरण की व्यवस्था जनता की शोषक होती है।

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