
- नए संभावित मार्ग में दो से तीन किमी बढ़ सकते है
- बदलाव पर वर्तमान प्रभावितों को तो राहत मिलेगी पर नए प्रभावित आयेंगे सामने
नागदा (प्रफुल्ल शुक्ला)। प्रस्तावित उमरना-रोहलखुर्द रेललाईन का सत्तापक्ष और विपक्ष सहित प्रभावितों के जबर्दस्त विरोध के चलते मार्ग में बदलाव के संकेत मिले है। सूत्रों की माने तो रेल विभाग वैकल्पिक मार्ग को लेकर विचार कर रहा है पर रेलविभाग कोई बड़ा बदलाव करने की स्थिति में नहीं है।
मामूली बदलाव होने कि स्थिति में वर्तमान प्रभावित जमीन मालिकों की जमीन तो बच जाएगी परंतु बदलाव के बाद रेलमार्ग की जद में आने वाले किसानों के नुकसान का क्या होगा? उनके नुकसान के जि़म्मेदार कौन होंगे? शहर में विगत कई दिनों से प्रस्तावित रेलमार्ग सुर्खियों में बना हुआ है। रेल मार्ग के प्रभावितों द्वारा लगातार जनप्रतिनिधियों, राज्यपाल, प्रशासनिक अधिकारियों और विपक्ष के नेताओं को ज्ञापन देकर प्रस्तावित रेलमार्ग का विरोध किया जा रहा है। इसी विरोध के बाद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने रेलमंत्री सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष प्रस्ताव में बदलाव करने का दबाव बनाया। कर्नाटक राज्यपाल डॉ. थावरचंद गेहलोत ने भी शनिवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर जनहित में उचित निर्णय लेने की अपील की है। पत्र में उन्होंने नागदा बचाओ संघर्ष समिति के माध्यम से रखी गयी समस्याओं को पत्र में उल्लिखित किया और जनहित में समिति के सुझावों पर विचार कर उचिंत निर्णय लेने के लिए आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया। कांग्रेस के सभी पार्षदों ने भी लिखित रूप से दिया की नगरपालिका परिषद इस मामले में परिषद की बैठक बुलाकर प्रस्ताव लाती है, प्रस्ताव का समर्थन किया जाएगा। भाजपा बहुमत परिषद ने प्रस्तावित रेल लाईन से प्रभावितों को बचाने और भविष्य को देखते हुए बने मास्टर प्लान के भी प्रभावित होने को लेकर आज परिषद की विशेष बैठक चल रही है। बैठक का एकमात्र एजेंडा प्रस्तावित नई रेल परियोजना में बदलाव को लेकर ही है।
बदलाव के मिले संकेत
शहर से उठे विरोध और सत्तापक्ष के नेताओं के भी प्रस्तावित रेलमार्ग में बदलाव कि माँग पर रेलविभाग में वैकल्पिक मार्ग पर विचार करने का मन बनाए जाने की अपुष्ट जानकारी मिली है। रेल विभाग से जुड़े सूत्रों की माने तो उच्च अधिकारियों से वैकल्पिक मार्ग की संभावना, रेलवे को होने वाले नुकसान आदि का सर्वे कर जानकारी माँगी गयी है। जानकारी यह भी है कि रेल विभाग बहुत बड़े बदलाव की स्थिति में नहीं है, क्योंकि प्रति किमी बदलाव पर विभाग के करोड़ों रुपए की लागत बढ़ जाती है। बदलाव में भागतपूरी औद्योगिक क्षेत्र को प्रभावित होने से बचाया जा सकता है। यदि मामूली बदलाव होता है तो दो से तीन किमी का अंतर आएगा ऐसी स्थिति में वर्तमान प्रभावित तो रेलमार्ग कि जद से बच सकते है पर अन्य किसानों की जमीन मार्ग के जद में आ जाएगी। ऐसे में इन प्रभावितों को संतुष्ट करना स्थानीय नेताओं के लिए नई चुनौती होगी। आने वाले कुछ ही दिनों में यह साफ हो जाएगा की रेल विभाग का फाइनल निर्णय क्या होता है?