
उज्जैन। शहर में पशु पक्षी पालने को लेकर लोगों का रुझान लगातार बढ़ता जा रहा हैं। ऐसे में पालतू वन्य प्राणी बेचने वालों की दुकानें भी खुलती जा रही हैं। हैरानी की बात है कि संचालित ज्यादातर पेट शॉप के संचालकों ने अपनी दुकान का पंजीयन ही नहीं कराया है। इस पर न तो पशु पालन विभाग ध्यान दे रहा है और ना ही उज्जैन का वन विभाग।
रजिस्ट्रेशन पांच वर्ष के लिए मान्य
मिली जानकारी के मुताबिक हर पेट शॉप का पंजीयन पांच वर्ष के मान्य रहता है। उसके बाद फिर आवेदन कर नवीनीकरण कराना पड़ता है लेकिन अग्रिबाण की पड़ताल में यह साफ हुआ कि अधिकांश दुकानदारों ने रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया है। वर्तमान में उज्जैन शहर में करीब 20 से ज्यादा पेट शॉप संचालित हो रहे है, लेकिन पशु पालन विभाग द्वारा सिर्फ 10 दुकानों का पंजीयन किया गया हैं।
पशु क्रूरता निवारण समिति को भी जानकारी नहीं
उज्जैन में पशु क्रूरता अधिनियम का कड़ाई से पालन हो, अधिनियम के खिलाफ कार्य करने वालों पर कार्रवाई हो सके। इसकी निगरानी के लिए 2003 में जिला पशु क्रूरता निवारण समिति उज्जैन का गठन किया गया था। उज्जैन पशु क्रूरता निवारण समिति में एक संयोजक, एक सह संयोजक और 13 सदस्य है। इसकी मॉनिटरिंग उज्जैन कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के पास है। अधिनियम के नियमों को पालन करवाने की जिम्मेदारी नगर निगम आयुक्त, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, वनमण्डला अधिकारी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला परिवहन अधिकारी, उप संचालक पशु चिकित्सा, जिला जनसंपर्क अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी सहित समिति के अन्य सदस्यों की होती है। पर शहर में बढ़ते अनियमित पेट शॉप्स पर समिति के सदस्यों को भी कोई जानकारी नहीं हैं।
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