
इंदौर। बीते कई सालों से गृह निर्माण संस्थाओं की जमीनों पर कब्जा जमाने वाले भूमाफिया हर तरह के हथकंडे अपनाते रहे हैं। इनमें गुंडों के साथ भी उनका तगड़ा गठजोड़ सामने आता रहा है और अभी कनाडिय़ा रोड स्थित डायमंड गृह निर्माण की जमीन को खाली कराने में भी यह गठजोड़ उजागर हुआ। मीडिया में छपी खबरों और उसके बाद भोपाल तक मचे हल्ले के साथ ही पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह की सख्ती का यह परिणाम रहा कि अंतत: थाना कनाडिय़ा के दो सिपाहियों को बुरी तरह से पीटने वाले चार गुंडों को धर दबोचना पड़ा और इनकी अच्छी पुलिसिया खातिरदारी भी की गई। थाना प्रभारी के खिलाफ भी जांच शुरू हुई। 12 साल पहले 42 मकानों को खाली कराने का ठेका भी चर्चित गुंडों को दिया गया, जिसका खुलासा अग्रिबाण ने भी किया था। पिछले कई सालों से जमीन को खाली कराने के ऐसे प्रयास निरंतर होते रहे हैं।
शहर की दो दर्जन से अधिक प्रमुख गृह निर्माण संस्थाएं ऐसी हैं, जिन पर बीते 20 सालों से भूमाफियाओं ने कब्जे जमाना शुरू किए और सदस्यों के भूखंडों की जमीनों को अलग-अलग टुकड़ों में बेच भी दिया। इनमें से कई जमीनों की रजिस्ट्रियां करवाई गई, तो कई के अनुबंध बाजार में आते रहे, जिसके बल पर चर्चित भूमाफियाओं ने हजारों करोड़ रुपए की अवैध उगाही भी कर ली और फिर यह पैसा राजनीतिक संरक्षण, थानों को खरीदने से लेकर कोर्ट-कचहरी और अपने खुद के इस्तेमाल में लाया जाने लगा। कई भूमाफियाओं के खिलाफ तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा चलवाए गए ऑपरेशन भूमाफिया के तहत एफआईआर भी दर्ज हुई और जेल भी गए। जमानत पर छूटने के बाद जमीनों की हेरा-फेरी के साथ ठिकाने लगाने में जुट गए। कनाडिय़ा रोड की जिस जमीन को लेकर अभी हफ्तेभर से हल्ला मचा है।
वह जमीन मुख्य रोड बायपास से लगी होने के कारण बेशकीमती हो गई है। हाजी एंड कम्पनी के कर्ताधर्ताओं ने कई अनुबंध कर लिए और डायमंड गृह निर्माण के नाम से 1987 में जमीन की रजिस्ट्री भी करवाई। कुछ सदस्यों को मकान बनाकर दिए, कुछ भूखंडों की रजिस्ट्रियां-नोटरी, एग्रीमेंट करवाए गए। जिस तरह अन्य गृह निर्माण संस्थाओं की जमीनों को भूमाफियाओं ने हड़पा, उसी तरह डायमंड गृह निर्माण की जमीन पर भी संघवी और दीपक मद्दे सहित अन्य ने अनुबंध कर डाले और उसके बाद मकानों को खाली कराने, जमीनों पर कब्जा लेने, बाउण्ड्रीवॉल बनाने सहित अन्य खेल शुरू हुए। यहां तक कि अग्रिबाण के पास 6 एकड़ जमीन का आपसी सहमति से किए गए। 6 करोड़ रुपए के अनुबंध की कॉपी भी है और यह अनुबंध 07.11.2014 को किया गया, यह अनुबंध साबित करता है कि इंदौरी भूमाफियाओं ने किस तरह संगठित अपराध का सहारा भी लिया। इस अनुबंध के मुताबिक, डायमंड कॉलोनी की जमीन खरीदने का ठेका उस बब्बू-छब्बू को दिया गया, जिसके खिलाफ कुछ समय पूर्व पुलिस प्रशासन ने रासुका से लेकर अन्य बड़ी कार्रवाई की और उसके अवैध निर्माणों को भी जमींदोज किया। मेसर्स संयम इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. के नाम से किए गए इस अनुबंध में जमीन खाली कराने के एवज में 6 करोड़ रुपए की राशि दिए जाने का भी करार किया गया। इसमें 42 मकानों को खाली कराया जाना था। बाद में इन भूमाफियाओं के खिलाफ एफआईआर होने और गुंडों की गिरफ्तारी के चलते मामला कुछ वर्ष तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा और 5 साल बाद फिर पिछले दिनों इस जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया। 22 जून की रात डायमंड पैलेस कॉलोनी की खाली जमीन पर कई गुंडे पहुंचे और वहां आए थाने के दो जवानों की इस कदर पिटाई की की एक जवान को तो 16 टांके भी आए और इसके बावजूद इस मामले को थाना प्रभारी सहर्ष यादव द्वारा छुपाया गया। जब मामला मीडिया में उजागर हुआ और भोपाल तक इसका हल्ला मचा और इसके साथ ही पुलिस कमिश्रर संतोष सिंह ने मामले की जानकारी हासिल की और वरिष्ठ अधिकारियों से जांच करवाई तो हकीकत सामने आई। इसके बाद थाना कनाडिय़ा ने मोहसीन अली, मोहम्मद अफजल, दर्शन कृष्णारे और चंदन वर्मा को गिरफ्तार किया। डीसीपी झोन-2 अमरसिंह राठौर के मुताबिक इस मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जो भूमाफिया इसमें लिप्त मिलेंगे उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved