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जुलाई में व्रत-त्योहारों की भरमार, 25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास, गुरु पूर्णिमा और रथयात्रा समेत कई प्रमुख पर्व इसी महीने

July 01, 2026

नई दिल्ली । जुलाई 2026 (2026) का महीना **हिंदू धर्म (Hindu Religion)**ावलंबियों के लिए विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व लेकर आया है। इस पूरे महीने में आषाढ़ मास (Ashadha Month) का प्रभाव रहेगा, जिसके दौरान अनेक प्रमुख व्रत (Fasts), पर्व और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। श्रद्धालु इस अवधि में पूजा-पाठ (Worship), दान-पुण्य और विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भाग लेकर आध्यात्मिक साधना को विशेष महत्व देते हैं।

इस महीने का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर 25 जुलाई को पड़ने वाली देवशयनी एकादशी है। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और अगले चार महीनों तक मांगलिक कार्यों पर विराम माना जाता है। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते, जबकि पूजा, जप, तप और व्रत का विशेष महत्व माना जाता है।

जुलाई में कई अन्य प्रमुख धार्मिक पर्व भी मनाए जाएंगे। 3 जुलाई को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी, 6 जुलाई को कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, 10 जुलाई को योगिनी एकादशी तथा 12 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का संयोग रहेगा। 14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या मनाई जाएगी, जबकि 15 जुलाई से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ होगा।

16 जुलाई का दिन भी धार्मिक दृष्टि से विशेष रहेगा। इस दिन भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा निकाली जाएगी। इसी तिथि पर कर्क संक्रांति भी रहेगी, जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद 17 जुलाई को अनिरुद्ध चतुर्थी और 22 जुलाई को भड़ली नवमी का पर्व मनाया जाएगा।

चातुर्मास प्रारंभ होने के एक दिन बाद 26 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। 28 जुलाई को कोकिला व्रत का पालन किया जाएगा, जबकि 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा और आषाढ़ पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरुजनों के प्रति सम्मान प्रकट करने और आध्यात्मिक परंपराओं के पालन की विशेष परंपरा है।

धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ जुलाई 2026 ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महीने कई प्रमुख ग्रह राशि परिवर्तन या अपनी चाल में बदलाव करेंगे। 4 जुलाई को शुक्र सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। 7 जुलाई को बुध मिथुन राशि में गोचर करेंगे। 14 जुलाई से गुरु अस्त होंगे, जबकि 16 जुलाई को सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। महीने के अंत में 27 जुलाई से शनि वक्री होकर अपनी उल्टी चाल प्रारंभ करेंगे, जिसे ज्योतिष में महत्वपूर्ण परिवर्तन माना जाता है।


  • धार्मिक विद्वानों के अनुसार, जुलाई का महीना आध्यात्मिक साधना, व्रत, दान और आत्मचिंतन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। चातुर्मास की शुरुआत के साथ श्रद्धालु धार्मिक अनुशासन का पालन करते हैं और भगवान विष्णु की विशेष आराधना करते हैं। वहीं विभिन्न पर्वों और ज्योतिषीय घटनाओं के कारण यह महीना धार्मिक आस्था के साथ-साथ पंचांग और ग्रह-नक्षत्रों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।

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