img-fluid

पुणे का ऐतिहासिक लोहागढ़ किला बना ‘सिया पॉइंट’, हत्याकांड के बाद बढ़ी भीड़ ने डार्क टूरिज्म पर खड़े किए गंभीर सवाल

July 01, 2026


नई दिल्ली । महाराष्ट्र (Maharashtra) के पुणे (Pune) जिले के ऐतिहासिक लोहागढ़ किला (Lohagad Fort) की पहचान इन दिनों एक अलग कारण से चर्चा में है। मराठा इतिहास और स्थापत्य विरासत के लिए प्रसिद्ध यह किला अब हालिया चर्चित हत्याकांड के बाद बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटकों की वजह से सुर्खियों में है। कई लोग किले के ऐतिहासिक महत्व को जानने के बजाय उस स्थान को देखने पहुंच रहे हैं, जहां कथित रूप से एक युवक की हत्या हुई थी। इस बदलते रुझान ने डार्क टूरिज्म (Dark Tourism) और समाज की संवेदनशीलता (Sensitivity) को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि कुछ लोग घटनास्थल को अनौपचारिक रूप से एक नए नाम से पुकार रहे हैं और उसी स्थान को देखने के लिए किले तक पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो और तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें बड़ी संख्या में पर्यटक घटनास्थल के आसपास मौजूद दिखाई देते हैं। कई लोग वहां फोटो, वीडियो और रील बनाने में भी रुचि दिखा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, जब लोग किसी ऐसी जगह की यात्रा करते हैं जो किसी हत्या, दुर्घटना, युद्ध, प्राकृतिक आपदा या अन्य त्रासदी से जुड़ी हो, तो उसे डार्क टूरिज्म कहा जाता है। पहले इस तरह के पर्यटन का उद्देश्य ऐतिहासिक घटनाओं को समझना, पीड़ितों को श्रद्धांजलि देना या इतिहास से सीख लेना माना जाता था। लेकिन हाल के वर्षों में सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण इसका स्वरूप तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है।

अब कई मामलों में लोग केवल वायरल घटनाओं से जुड़ी जगहों को देखने की उत्सुकता में वहां पहुंच रहे हैं। ऐसे स्थानों पर जाने के पीछे ऐतिहासिक या सामाजिक समझ विकसित करने की बजाय जिज्ञासा, फोटो खिंचवाने या सोशल मीडिया पर सामग्री साझा करने की प्रवृत्ति अधिक दिखाई देती है। यही कारण है कि इस बदलते व्यवहार को लेकर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विशेषज्ञ चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

लोहागढ़ किले का इतिहास मराठा साम्राज्य से जुड़ा रहा है और यह अपने स्थापत्य, प्राकृतिक सौंदर्य तथा सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। वर्षों से यहां आने वाले पर्यटक इसके ऐतिहासिक महत्व, प्राचीन संरचनाओं और प्राकृतिक वातावरण का अनुभव करने पहुंचते रहे हैं। हालांकि हालिया घटना के बाद चर्चा का केंद्र किले का इतिहास नहीं, बल्कि अपराध से जुड़ा घटनास्थल बनता नजर आ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैलने वाले वीडियो और चर्चाएं इस तरह की प्रवृत्तियों को बढ़ावा देती हैं। किसी गंभीर आपराधिक घटना से जुड़े स्थान को मनोरंजन, रोमांच या वायरल सामग्री के रूप में प्रस्तुत करना समाज में संवेदनशीलता की कमी का संकेत माना जा सकता है। इससे पीड़ित परिवारों की भावनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं और अपराध जैसी गंभीर घटनाओं के प्रति समाज का दृष्टिकोण बदल सकता है।


  • सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐतिहासिक स्थलों की पहचान उनके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व से होनी चाहिए, न कि किसी अपराध या सनसनीखेज घटना से। उनका मानना है कि पर्यटन का उद्देश्य ज्ञान, विरासत और संस्कृति को समझना होना चाहिए। किसी त्रासदी को आकर्षण का केंद्र बना देना न केवल सामाजिक संवेदनशीलता को प्रभावित करता है, बल्कि ऐतिहासिक धरोहरों की मूल पहचान को भी धूमिल कर सकता है। ऐसे में डार्क टूरिज्म के बढ़ते प्रभाव के बीच संतुलित और जिम्मेदार सामाजिक व्यवहार की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।

    Share:

  • Monsoon Session: Parliament's Monsoon Session Likely to Begin on July 20; Expected to Last Three Weeks

    Wed Jul 1 , 2026
    New Delhi. Details regarding the Monsoon Session have emerged. The Parliament’s Monsoon Session is likely to commence on July 20 and could last for approximately three weeks. However, a final decision on this is yet to be taken by the Cabinet Committee on Parliamentary Affairs. Typically, the Monsoon and Winter sessions comprise 20 sittings and […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved