अयोध्या। राम मंदिर (Ram Mandir) में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस की जांच में आरोपियों के मोबाइल चैट (Mobile Chat) से ऐसे संकेत मिले हैं, जिनके आधार पर पूरे मामले में टिन्नू यादव की भूमिका अहम मानी जा रही है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि चढ़ावे से करीब दो करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई। हालांकि इस राशि की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
रविवार को विवेचक और क्षेत्राधिकारी (सीओ) आशुतोष तिवारी ने कोर्ट की अनुमति के बाद जिला जेल पहुंचकर आरोपियों से करीब पांच घंटे तक पूछताछ की। सुबह करीब 11:30 बजे शुरू हुई यह प्रक्रिया शाम लगभग 4:15 बजे तक चली। पूछताछ के दौरान पहले से जुटाए गए डिजिटल साक्ष्यों और मोबाइल चैट के आधार पर कई सवाल किए गए तथा आरोपियों के लिखित बयान भी दर्ज किए गए। पुलिस इन बयानों को जांच रिपोर्ट के साथ अदालत में पेश करेगी।
जेल में पुलिस ने अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पाण्डेय से पहले अलग-अलग और फिर आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की। इससे पहले आरोपी अविनाश से हुई पूछताछ में जो जानकारियां सामने आई थीं, उनका सत्यापन भी इसी दौरान किया गया। पुलिस को सात आरोपियों से पूछताछ की अनुमति मिली है। आने वाले दिनों में रमाशंकर मिश्र, टिन्नू यादव, मनीष यादव और सुभाष श्रीवास्तव से भी पूछताछ किए जाने की संभावना है।
जांच में जुटी साइबर सेल ने आरोपियों के पिछले एक वर्ष के मोबाइल चैट का डेटा खंगाला है। इसी डिजिटल रिकॉर्ड में पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। जांच के अनुसार अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा के बीच हुई बातचीत में कथित तौर पर रकम के बंटवारे को लेकर विवाद के संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि फरवरी में पैसों के बंटवारे को लेकर दोनों के बीच मतभेद भी हुआ था, जिसकी जानकारी चैट रिकॉर्ड से सामने आई है।
जांच में मिले नए तथ्यों के आधार पर पुलिस अब टिन्नू यादव को कस्टडी रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान उससे पूरे नेटवर्क, धन के प्रवाह और कथित हेराफेरी के तरीके से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि मंदिर परिसर से नकदी बाहर कैसे निकाली गई। पुलिस का मानना है कि बिना संगठित नेटवर्क के इतनी बड़ी रकम की कथित हेराफेरी संभव नहीं थी। इसलिए उन लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है, जिन्होंने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सहयोग किया हो या लापरवाही बरती हो।
सूत्रों के मुताबिक, अनुकल्प मिश्रा पर गणना के दौरान वाउचर तैयार करने की जिम्मेदारी थी। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल कथित वित्तीय गड़बड़ी को छिपाने के लिए किया गया। फिलहाल जांच एजेंसियां डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने में लगी हैं ताकि अदालत में मजबूत आधार के साथ पूरा मामला पेश किया जा सके।
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