नई दिल्ली। वैश्विक समुद्री व्यापार (Global maritime trade) के अहम मार्ग लाल सागर में एक बार फिर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। यमन के पश्चिमी तट के पास एक व्यावसायिक मालवाहक जहाज पर अज्ञात हथियारबंद लोगों ने हमला कर दिया। घटना की पुष्टि यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने की है। फिलहाल किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है और न ही किसी बड़े नुकसान या हताहत होने की आधिकारिक जानकारी सामने आई है।
UKMTO के अनुसार, हमला यमन के तटीय शहर होदेइदाह के निकट हुआ, जो ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के प्रभाव वाले क्षेत्र में आता है। मालवाहक जहाज उस समय होदेइदाह से करीब 30 समुद्री मील (लगभग 55 किलोमीटर) दक्षिण-पश्चिम में मौजूद था। जहाज के चालक दल ने तत्काल घटना की सूचना संबंधित अधिकारियों को दी, जिसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई।
हालांकि इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली है, लेकिन हाल के दिनों में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर और अदन की खाड़ी से गुजरने वाले जहाजों को फिर से निशाना बनाने की चेतावनी दी थी। इस घटना के बाद संदेह की निगाहें भी उसी दिशा में हैं, हालांकि हूती संगठन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
अक्टूबर 2023 में गाजा संघर्ष शुरू होने के बाद से हूती विद्रोही बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर के दक्षिणी हिस्से से गुजरने वाले कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइल और अन्य हथियारों से हमले कर चुके हैं। इन हमलों के चलते कई वैश्विक शिपिंग कंपनियों ने स्वेज नहर का रास्ता छोड़कर अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप के लंबे समुद्री मार्ग का इस्तेमाल शुरू कर दिया, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों बढ़ गए।
क्षेत्र में केवल हूती खतरा ही नहीं है, बल्कि सोमाली समुद्री डाकुओं की गतिविधियां भी फिर तेज होती दिखाई दे रही हैं। एक जुलाई को बलहाफ बंदरगाह के दक्षिण में एक जहाज पर चार हथियारबंद लोगों ने छोटी नाव से पहुंचकर हमला किया था। UKMTO के मुताबिक इस घटना में जहाज के ब्रिज को मामूली नुकसान पहुंचा और इसे समुद्री डाकुओं की करतूत माना जा रहा है।
लाल सागर और अदन की खाड़ी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल हैं। इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस, कंटेनर और अन्य आवश्यक वस्तुओं का अंतरराष्ट्रीय परिवहन होता है। लगातार हो रहे हमलों के कारण समुद्री सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। अमेरिका, ब्रिटेन और उनके सहयोगी देशों ने क्षेत्र में नौसैनिक गश्त बढ़ा दी है, लेकिन इसके बावजूद इस रणनीतिक जलमार्ग में सुरक्षा चुनौती बनी हुई है।
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