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बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा विवाद पर तेज हुई जांच, कांग्रेस का सत्याग्रह ऐलान, CCTV फुटेज पर टिकी नजर

July 06, 2026

नई दिल्ली । अयोध्या राम मंदिर(Ayodhya Ram Mandir) के बाद अब उत्तराखंड(Uttarakhand’s)के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम(Badrinath Dham) में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर प्रशासन ने पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है जिसे एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में सबसे अहम पहलू यह सामने आया है कि मंदिर परिसर में एक जून से नए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे जबकि कथित घटना दो जुलाई की बताई जा रही है। ऐसे में जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि फुटेज से पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकेगी।

मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि जांच समिति सभी साक्ष्यों वैज्ञानिक तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है। उन्होंने चढ़ावा गणना में लगे कर्मचारियों और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी तरह के दस्तावेज सीसीटीवी फुटेज या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो सके।

मंदिर प्रशासन के अनुसार सीसीटीवी प्रणाली में लगभग 45 दिनों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। चूंकि नए कैमरे एक जून से सक्रिय हैं इसलिए दो जुलाई की कथित घटना से जुड़ा पूरा वीडियो रिकॉर्ड उपलब्ध होने की संभावना है। जांच टीम इन्हीं फुटेज और अन्य दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही है।

मामले की जांच के लिए गठित समिति में वित्त नियंत्रक हेम कांडपाल विधि अधिकारी एसएस वर्त्वाल मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डीएस भुजवाण को शामिल किया गया है। समिति सभी संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ करने के साथ चढ़ावा गणना की पूरी प्रक्रिया की भी समीक्षा कर रही है।


  • इस बीच मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। उत्तराखंड कांग्रेस ने आठ जुलाई को पूरे प्रदेश में उपवास और सत्याग्रह करने की घोषणा की है। कांग्रेस का आरोप है कि मंदिरों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी ने यह भी मांग की है कि पूरे मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक स्तर पर कराई जाए ताकि किसी तरह का संदेह न रहे।

    उधर श्री बदरीश पंडा पंचायत ने भी मंदिर की गरिमा से जुड़े इस मामले पर चिंता जताई है। पंचायत का कहना है कि यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है तो दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी उच्च अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। तीर्थपुरोहितों और पुजारियों ने भी इस पूरे घटनाक्रम को धाम की प्रतिष्ठा से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

    अब पूरे मामले में सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज पर टिकी हुई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी बड़ा संदेश देगा।

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