
जबलपुर। दमोह नाका स्थित शांति नगर में अंजलि मिश्रा, बिटिया राधिका एवं पुत्र गोपाल मिश्रा के निवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा मूल पाठ के दौरान सोमवार को भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। भगवताचार्य डॉ. प्रमेश शास्त्री ने अपने श्रीमुख से कथा का वाचन करते हुए रुक्मिणी विवाह की महिमा का विस्तार से वर्णन किया।
कथाव्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी का दिव्य मिलन केवल एक विवाह प्रसंग नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण, प्रेम और धर्म की विजय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मानव जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है तथा व्यक्ति के भीतर भक्ति, संस्कार और सदाचार का संचार करता है। कथा के दौरान श्रद्धालु रुक्मिणी विवाह के प्रसंग को सुनकर भाव-विभोर हो गए। पूरे वातावरण में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए और कथा का रसास्वादन किया।
इस अवसर पर डॉ. नारायण ज्योति कुररिया, नरेंद्र दुबे, सुनीता दुबे, सुनील कुमार, आशा मिश्रा, अखिलेश दुबे, साधना दुबे, राममिलन, मदन कुमार, उमाशंकर, रमाशंकर, दयाशंकर उपाध्याय, संतोष चौबे, पंडित जितेंद्र उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तगण उपस्थित रहे। आयोजकों ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के आगामी प्रसंगों में भी श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन धार्मिक आयोजन किए जाएंगे तथा अधिक से अधिक लोगों से कथा श्रवण कर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया गया।
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