
वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका को लेकर अमेरिकी सांसदों ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं। अमेरिकी सीनेटर रिक स्कॉट ने पाकिस्तान की भूमिका पर चिंता जताते हुए कहा कि अमेरिका को इस पूरे मामले में यह याद रखना चाहिए कि पाकिस्तान वास्तव में क्या है। सीनेटर रिक स्कॉट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करते हुए कहा कि वॉशिंगटन को पाकिस्तान की पृष्ठभूमि को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने लिखा, ‘इस पूरे मामले के बीच हमें यह याद रखना होगा कि पाकिस्तान वास्तव में कौन है।’
स्कॉट ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा, ‘यह वही देश है जहां ओसामा बिन लादेन करीब एक दशक तक छिपा रहा। जहां ईसाइयों को निशाना बनाने के लिए एकतरफा ईशनिंदा कानूनों को चुनिंदा तरीके से लागू किया जाता है। और जहां के प्रधानमंत्री ने हाल ही में ईरान पर शासन करने वाले नरसंहार करने वाले तानाशाह की प्रशंसा की। पाकिस्तान संघर्ष में मध्यस्थता करने के लिए उतना ही योग्य है, जितना कि हमास को पनाह देने वाला कतर।’
रिक स्कॉट की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की प्रशंसा की थी। शहबाज शरीफ का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। Memri TV द्वारा शेयर किए गए वीडियो में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने खामेनेई को ‘महान विद्वान और नेता’ बताया। शहबाज शरीफ ने कहा थी, ‘वह एक महान विद्वान और नेता थे, जिन्होंने धैर्य, साहस, दृढ़ता और दूरदर्शिता दिखाई। उन्होंने पूरी निष्ठा और अटूट प्रतिबद्धता के साथ ईरान की सेवा की। दुनिया भर के लाखों मुसलमान उन्हें याद रखेंगे। पाकिस्तान और ईरान दो भाई जैसे देश हैं और हमारे दिल एक साथ धड़कते हैं। हम हर परिस्थिति में एक-दूसरे के साथ खड़े रहेंगे और साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे।’
शहबाज शरीफ के इस बयान पर अमेरिकी टीवी टिप्पणीकार मार्क लेविन ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए कहा, ‘यह व्यक्ति ईरान के साथ हमारा एक मध्यस्थ था! यह कल्पना से परे लगता है। अमेरिका को अपनी पोजिशनिंग ठीक करनी होगी।’ यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी सांसदों ने पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी पाकिस्तान की भूमिका को लेकर चिंता जताई थी।
ग्राहम ने मई में सोशल मीडिया पोस्ट और अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई के दौरान कहा था, ‘मेरे लिए काफी समय से यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान का मध्यस्थ बनना बेहद समस्याग्रस्त है। इजरायल के प्रति उनकी नाराजगी लंबे समय से चली आ रही है। यह भी नकारा नहीं जा सकता कि ईरानी सैन्य विमानों को पाकिस्तानी हवाई अड्डों पर रखा जा रहा है और इजरायल के खिलाफ पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं के पुराने बयान चिंताजनक हैं। ख्वाजा आसिफ का अब्राहम अकॉर्ड्स को लेकर यह कहना कि पाकिस्तान इसमें कभी शामिल नहीं होगा क्योंकि वह इजरायल पर भरोसा नहीं करता, चिंता की बात है। हो सकता है कि यह वीडियो एक साल पुराना हो, लेकिन मुझे डर है कि यह भावना अभी भी कायम है। ऐसे में जरूरी है कि पाकिस्तान राष्ट्रपति ट्रंप के अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने के आह्वान का जवाब दे।’
रिक स्कॉट ने पिछले महीने भी इसी तरह का बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि ‘कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह देने का लंबा इतिहास रहा है और इस समय वे सार्थक शांति स्थापित करने के बजाय ईरान के दशकों पुराने आतंकवादी अभियान को समर्थन देने में ज्यादा रुचि रखते दिखाई दे रहे हैं।’ अमेरिकी सांसदों की इन टिप्पणियों के बाद ईरान-अमेरिका संघर्ष में पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थ भूमिका को लेकर वॉशिंगटन में बहस तेज हो गई है।
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