
जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज ने चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए जीवनरक्षक पुनर्निर्माण (रिकंस्ट्रक्टिव) सर्जरी में उपयोग होने वाली अत्यधिक महंगी सामग्री एसेसुलर डरमन मैक्ट्रिस एडीएम का स्वदेशी संस्करण विकसित किया है। इस नवाचार से अब तक आयात पर निर्भर इस तकनीक की लागत में 100 गुना से अधिक की कमी आने का दावा किया गया है। यह उपलब्धि न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक किफायती बनाएगी, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए भी उन्नत उपचार का रास्ता आसान करेगी। एडीएम एक विशेष प्रकार का जैविक ऊतक होता है, जिसका उपयोग प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी, गंभीर घावों के उपचार, जलने के मामलों और अन्य जटिल शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं में किया जाता है। अब तक इसकी आपूर्ति मुख्य रूप से विदेशों से होती थी, जिसके कारण इसकी कीमत एक लाख से तीन लाख रुपये प्रति पीस तक होती थी।
पेटेंट जर्नल ऑफ इंडिया में प्रकाशित हुआ नवाचार
कॉलेज प्रबंधन के अनुसार इस महत्वपूर्ण अनुसंधान को पेटेंट जर्नल ऑफ इंडिया में आधिकारिक रूप से प्रकाशित किया गया है, जो इस उपलब्धि की वैज्ञानिक और तकनीकी मान्यता का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
संयुक्त प्रयासों से मिली सफलता
इस परियोजना को मेडिकल कॉलेज के डीन प्रो. नवनीत सक्सेना के नेतृत्व में आगे बढ़ाया गया, जबकि अनुसंधान टीम का मार्गदर्शन प्रो. पवन अग्रवाल ने किया। रूष्ठक्र की स्थानीय अनुसंधान सलाहकार समिति के सदस्यों ने भी अनुसंधान के दौरान महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया।
आईसीएमआर और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग का मिला सहयोग
इस अनुसंधान परियोजना को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के डीएचआर और आईसीएमआर का वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ। संस्थान का मानना है कि यह उपलब्धि भारत में स्वदेशी चिकित्सा तकनीकों के विकास को नई दिशा देगी और भविष्य में लाखों मरीजों को कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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