
नई दिल्ली । मराठी फिल्म देऊल बंद 2 (Deool Band 2) को आर्थिक सहयोग देने के बाद अभिनेता शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) एक बार फिर सोशल मीडिया (Social Media) पर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। फिल्म के डिजिटल सिनेमा पैकेज (Digital Cinema Package) (डीसीपी) से जुड़े भुगतान में राहत देने को लेकर कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसे धार्मिक नजरिए से जोड़ते हुए सवाल उठाए। हालांकि फिल्म के निर्देशक प्रवीण तारडे (Pravin Tarde) ने इन प्रतिक्रियाओं का जवाब देते हुए कहा कि किसी कलाकार की मदद को धर्म या राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
फिल्म के निर्देशक के अनुसार, उनकी टीम सीमित बजट के साथ फिल्म की रिलीज की तैयारी कर रही थी। डीसीपी तैयार कराने का कुल खर्च उनकी क्षमता से कहीं अधिक था और तत्काल पूरी राशि का भुगतान करना संभव नहीं था। ऐसे में उन्होंने शाहरुख खान की कंपनी से संपर्क किया और अपनी आर्थिक स्थिति से अवगत कराया। निर्देशक का कहना है कि फिल्म देखने के बाद शाहरुख की टीम ने इसे सकारात्मक बताया, जिसके बाद अभिनेता ने बिना देरी किए पहले फिल्म रिलीज कराने और भुगतान बाद में करने की सहमति दे दी।
निर्देशक ने कहा कि यह फैसला पूरी तरह पेशेवर सहयोग और फिल्म उद्योग में एक-दूसरे की मदद की भावना के तहत लिया गया था। उनके अनुसार, किसी फिल्म को समय पर रिलीज होने में सहायता करना एक सकारात्मक पहल है और इसे धार्मिक पहचान से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बड़े दिल से मदद करता है तो उसकी सराहना केवल इसलिए नहीं रोकी जानी चाहिए क्योंकि उसका धर्म अलग है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शाहरुख खान का सार्वजनिक रूप से धन्यवाद करने का उनकी व्यक्तिगत विचारधारा या किसी धार्मिक दृष्टिकोण से कोई संबंध नहीं है। उनके मुताबिक, अच्छे काम की सराहना करना सामान्य मानवीय व्यवहार है और इसे किसी वैचारिक बहस का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। निर्देशक ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का मूल्यांकन उसके व्यवहार और सहयोग की भावना से होना चाहिए, न कि उसकी धार्मिक पहचान से।
यह पहली बार नहीं है जब इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। इससे पहले भी निर्देशक ने एक साक्षात्कार में शाहरुख खान की मदद का उल्लेख किया था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इसी तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। उस समय भी उन्होंने स्पष्ट किया था कि फिल्म को समय पर दर्शकों तक पहुंचाने में मिला सहयोग उनके लिए महत्वपूर्ण था और उसी भावना से उन्होंने अभिनेता का आभार व्यक्त किया था।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच देऊल बंद 2 ने बॉक्स ऑफिस पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। फिल्म ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छा कारोबार करते हुए मराठी सिनेमा की सफल फिल्मों में अपनी जगह बनाई है। इसकी व्यावसायिक सफलता ने क्षेत्रीय फिल्मों की बढ़ती स्वीकार्यता और दर्शकों की रुचि को भी रेखांकित किया है।
सोशल मीडिया पर चल रही बहस के बावजूद फिल्म से जुड़े लोगों का कहना है कि सिनेमा का उद्देश्य लोगों को जोड़ना है, न कि उन्हें धर्म या पहचान के आधार पर बांटना। उनका मानना है कि फिल्म उद्योग में सहयोग और पेशेवर समर्थन को सकारात्मक दृष्टि से देखा जाना चाहिए। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत सद्भावना और रचनात्मक सहयोग को विवाद का विषय बनाने के बजाय कला और उद्योग के हित में समझा जाना अधिक उचित होगा।
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