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क्या बिल्ली पालने से बढ़ सकता है मानसिक बीमारी का खतरा? नई स्टडी ने चौंकाए वैज्ञानिक सावधानी बरतने की दी सलाह

July 09, 2026

नई दिल्ली । घर में बिल्ली(cat)पालना आजकल केवल शौक नहीं बल्कि कई लोगों की जीवनशैली(lifestyles) का हिस्सा बन चुका है। पालतू जानवरों से लगाव तनाव कम करने और मानसिक सुकून(provide mental peace) देने के लिए भी जाना जाता है। हालांकि हाल ही में सामने आई एक वैज्ञानिक स्टडी(scientific study) ने बिल्ली पालने वालों का ध्यान एक संभावित स्वास्थ्य जोखिम की ओर खींचा है। शोध में दावा किया गया है कि बिल्लियों के संपर्क और एक गंभीर मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया के बीच संभावित संबंध देखा गया है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि इसका मतलब यह नहीं है कि बिल्ली पालने से हर व्यक्ति को यह बीमारी हो जाएगी।

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कई वर्षों में प्रकाशित विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों का विश्लेषण किया। इस समीक्षा में अलग अलग देशों के शोध आंकड़ों को शामिल किया गया। अध्ययन के दौरान यह पाया गया कि जिन लोगों का बिल्लियों से अधिक संपर्क रहा उनमें सिजोफ्रेनिया से जुड़े जोखिम कुछ मामलों में अधिक दिखाई दिए। हालांकि वैज्ञानिकों ने यह भी माना कि इस संबंध को पूरी तरह साबित करने के लिए अभी और विस्तृत शोध की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस संभावित संबंध का कारण टोक्सोप्लाज्मा गोंडी नामक एक सूक्ष्म परजीवी माना जाता है। यह परजीवी मुख्य रूप से संक्रमित बिल्लियों के मल में पाया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति उचित स्वच्छता का पालन नहीं करता और किसी तरह यह परजीवी शरीर में प्रवेश कर जाए तो कुछ मामलों में यह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। हालांकि अधिकांश स्वस्थ लोगों में संक्रमण होने पर भी कोई गंभीर लक्षण दिखाई नहीं देते।

डॉक्टरों का कहना है कि सिजोफ्रेनिया एक जटिल मानसिक बीमारी है जिसके पीछे केवल एक कारण जिम्मेदार नहीं होता। आनुवंशिक प्रवृत्ति मानसिक तनाव मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन पर्यावरणीय प्रभाव और कई अन्य जैविक कारण भी इस बीमारी के विकास में भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए केवल बिल्ली पालने को इस बीमारी का सीधा कारण मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।


  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि आप घर में बिल्ली पालते हैं तो घबराने की आवश्यकता नहीं है बल्कि कुछ सामान्य सावधानियां अपनाना ही पर्याप्त है। बिल्ली का लिटर बॉक्स साफ करने के बाद हमेशा साबुन से अच्छी तरह हाथ धोएं। घर और पालतू जानवर दोनों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। नियमित रूप से पशु चिकित्सक से बिल्ली का स्वास्थ्य परीक्षण कराएं और गर्भवती महिलाओं कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों तथा छोटे बच्चों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि टोक्सोप्लाज्मा संक्रमण इन समूहों के लिए अधिक जोखिम पैदा कर सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पालतू जानवरों से मिलने वाले भावनात्मक और मानसिक लाभ भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। इसलिए किसी एक अध्ययन के आधार पर बिल्ली पालना छोड़ देने की जरूरत नहीं है। जरूरी यह है कि वैज्ञानिक तथ्यों को समझते हुए स्वच्छता और जिम्मेदार देखभाल को प्राथमिकता दी जाए। संतुलित जानकारी और सावधानी ही आपको और आपके पालतू साथी दोनों को सुरक्षित रख सकती है।

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