
नई दिल्ली: बांग्लादेश (Bangladesh) के कॉक्स बाजार में बने रोहिंग्या रिफ्यूजी कैंप (Rohingya refugee camp) में बुधवार को भारी बारिश के बाद हुए लैंड स्लाइड में 8 बच्चों की मौत हो गई, जबकि 5 बच्चे घायल हो गए. हादसा पहाड़ी ढलान पर बने एक मदरसे में हुआ. कई दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी की मिट्टी खिसक गई और मदरसा मिट्टी व मलबे के नीचे दब गया.
बचाव दल ने 13 बच्चों को बाहर निकाला, लेकिन इनमें से 8 बच्चों की जान नहीं बच सकी. घायल बच्चों का इलाज कैंप के अस्पताल में चल रहा है. मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी भारी बारिश का अनुमान जताया है. इससे लैंडस्लाइड और अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है. यह हादसा ऐसे समय हुआ है, जब कुछ दिन पहले भी इसी इलाके के रोहिंग्या कैंपों में बारिश के कारण हुए अलग-अलग लैंड स्लाइड में 8 लोगों की मौत हुई थी. लगातार बारिश के बीच प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने और ज्यादा खतरे वाले इलाकों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है.
कॉक्स बाजार में दुनिया का सबसे बड़ा रोहिंग्या रिफ्यूजी कैंप है. यहां 12 लाख से ज्यादा रोहिंग्या रिफ्यूजी रहते हैं. इनमें से ज्यादातर लोग साल 2017 में म्यांमार में हुई सैन्य कार्रवाई के बाद बांग्लादेश आए थे. बड़ी संख्या में लोग पहाड़ी ढलानों पर बने अस्थायी घरों में रहते हैं. इसलिए हर साल मॉनसून के दौरान यहां लैंड स्लाइड का खतरा बढ़ जाता है.
क्यों होता है भूस्खलन?
रोहिंग्या कैंपों में ज्यादातर घर बांस और तिरपाल से बने हैं. ये घर पहाड़ी ढलानों पर बने हुए हैं. लगातार बारिश होने पर मिट्टी में पानी भर जाता है और वह कमजोर हो जाती है. इसके बाद मिट्टी नीचे की ओर खिसकने लगती है. इसी को लैंड स्लाइड कहते हैं. इसकी चपेट में आने वाले घर और इमारतों को भारी नुकसान होता है.
हर साल मॉनसून में बढ़ता है खतरा
बांग्लादेश में जून से सितंबर तक मॉनसून के दौरान तेज बारिश होती है. कॉक्स बाजार के पहाड़ी इलाकों में इसका असर ज्यादा देखने को मिलता है. यहां पहले भी कई बार भारी बारिश के बाद लैंड स्लाइड हो चुका है. इस बार भी कुछ ही दिनों के अंदर दो बड़े हादसे हो चुके हैं, जिनमें बच्चों समेत कई लोगों की जान गई है.
आगे भी रहना होगा सतर्क
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बारिश होने की संभावना जताई है. इसे देखते हुए प्रशासन ने लैंड स्लाइड और अचानक बाढ़ को लेकर अलर्ट जारी किया है. खतरे वाले इलाकों में रहने वाले कुछ परिवारों को सुरक्षित जगहों पर भेजा जा रहा है. लेकिन अब भी बड़ी संख्या में लोग ऐसे इलाकों में रह रहे हैं, जहां भारी बारिश के दौरान खतरा बना रहता है.
रोहिंग्या कैंप का यह हादसा दिखाता है कि लगातार बारिश और कमजोर पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों पर सबसे ज्यादा खतरा रहता है. मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए आने वाले दिनों में भी सावधानी जरूरी होगी. ऐसे में लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना और खतरे वाले इलाकों पर नजर रखना बहुत जरूरी है.
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