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उज्जैन। कैदियों से ओवर लोड भैरवगढ़ जेल के अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है। अस्पताल में कैदियों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर्स तक नहीं है। यहाँ एक भी वेंटिलेटर मशीन नहीं है। ऐसे में अचानक हुई मेडिकल इमरजेंसी में कैदी को चरक अस्पताल लेकर आना पड़ता है।
उल्लेखनीय है कि भैरवगढ़ जेल में क्षमता से अधिक कैदी हैं। जेल में कैदियों को रखने की क्षमता करीब 2200 है, लेकिन फिलहाल में इससे अधिक संख्या में कैदी रह रहे हैं। इसका असर जेल की व्यवस्थाओं पर भी पड़ रहा है। जेल में स्वास्थ्य सेवाओं की दरकार है। मुख्य रूप से जेल के अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर्स और एक वेंटिलेटर मशीन नहीं है। जेल में स्वास्थ्य सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। अस्पताल की समस्या यहां बनी हुई है। तबीयत खराब होने पर कैदियों को उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है। जेल में 2200 कैदियों की स्वास्थ्य व्यवस्था तीन डॉक्टरों के भरोसे हैं। जानकारी के मुताबिक जेल का अपना एक ही डॉक्टर है। स्वास्थ्य विभाग ने दो डॉक्टरों को जिला जेल के लिए प्रतिनियुक्त कर रखा हैं। इतना ही नहीं, जेल में मेडिकल स्टॉफ का भी अभाव हैं, जिसके चलते मरीजों को बाहर भी इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही हैं।
सैकड़ों कैदी हैं हार्ट पेशेंट
जेल में कैंसर, पैरालिसिस और हार्ट की गंभीर बीमार के सैकड़ों मरीज कैदी हैं। जिनकी अचानक तबीयत खराब होने और समय पर इलाज शुरू नहीं होने से ये बीमार कैदी दर्द से कराहते रहते हैं। समस्या तब विकराल हो जाती है, जब कोई कैदी गम्भीर रूप से बीमार हो जाता है और असहनीय पीड़ा से परेशान हो उठता है। ऐसी स्थिति में बीमार कैदी को इलाज के लिए तकरीबन 8 किलोमीटर दूर चरक अस्पताल भेजना पड़ जाता है। ऐसा वक्त उस कैदी के साथ साथ जेल प्रशासन के लिए भी असहज और सिरदर्द बन जाता है। चूंकि चरक अस्पताल भेजने से विभागीय नियमानुसार पहले तमाम प्रकार की कागजी कार्रवाई करनी पड़ती है। वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी पड़ती है। कैदी की सुरक्षा के लिए अलग से इंतजाम करना पड़ता है। तब तक कैदी की परेशान कम नहीं होती है।
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