
- कलेक्टर हुए नाराज- गलत जानकारी देने वाली सुपरवाइजर का 7 दिन का वेतन रोका
उज्जैन। जिले के बडऩगर में गुरुवार को हुई विकासखंड स्तरीय समीक्षा बैठक में कई विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। कलेक्टर ने शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास और निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए लापरवाही पर नाराजगी जताई। गलत जानकारी देने और कार्य में लापरवाही मिलने पर इंगोरिया सेक्टर की एक सुपरवाइजर का सात दिन का वेतन रोकने के निर्देश भी दिए।
जनपद पंचायत बडऩगर सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर रोशकुमार सिंह ने सबसे पहले शिक्षा विभाग की प्रगति पर नजर डाली। स्कूलों के वार्षिक परीक्षा परिणामों की समीक्षा के दौरान कई विद्यालयों का प्रदर्शन कमजोर मिलने पर उन्होंने अधिकारियों से कारण पूछे। निर्देश दिए कि कमजोर स्कूलों के प्राचार्यों की अलग बैठक लेकर परिणाम सुधार की ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही नए सत्र में शत-प्रतिशत प्रवेश, शिक्षकों की ई-अटेंडेंस, विद्यार्थियों की अपार आईडी, छात्रावासों की व्यवस्थाएं और मध्यान्ह भोजन की नियमित निगरानी करने को कहा। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में टीबी मुक्त अभियान, मरीजों के उपचार और फूड बास्केट वितरण की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिलने पर तेजी लाने के निर्देश दिए। 70 वर्ष से अधिक उम्र के पात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड जल्द बनाने, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी करने और एक सप्ताह में बर्थ वेटिंग रूम शुरू करने के निर्देश भी दिए। कुपोषित बच्चों के बेहतर उपचार पर भी जोर दिया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान विभागीय कामकाज में लापरवाही सामने आई। इंगोरिया सेक्टर की सुपरवाइजर द्वारा गलत जानकारी प्रस्तुत करने और कार्य में लापरवाही मिलने पर कलेक्टर ने उसका सात दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की नियमित उपस्थिति और कुपोषित बच्चों के फॉलोअप को भी सख्ती से निर्धारित करने को कहा। प्रधानमंत्री आवास योजना के अधूरे मकानों, अमृत-2.0 की जल प्रदाय परियोजनाओं और जल जीवन मिशन की लंबित योजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए। निर्माण विभागों को भी गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण करने और पूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण जनप्रतिनिधियों के माध्यम से कराने को कहा। बैठक के अंत में कलेक्टर ने साफ कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की लापरवाही या शिकायत बर्दाश्त नहीं होगी। सभी विभागों को आपसी समन्वय से काम करते हुए शासन की योजनाओं का लाभ समय पर पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना होगा।