
आयुक्त बोले – रिकॉर्ड दुरुस्ती भी करवा दी, आमने-सामने की पूछताछ भी फिलहाल जारी, जांच को अंतिम स्तर तक ले जाकर दोषियों के खिलाफ दर्ज करवाएंगे प्रकरण
इंदौर। नगर निगम (Municipal council) के बहुचर्चित नामांतरण घोटाले (Mutation Scams) की जांच इन दिनों चल रही है। आयुक्त (Commissioner) ने जहां अधिकारियों का नए सिरे से कार्य विभाजन किया और उपायुक्त गरिमा पाटीदार को राजस्व में सम्पत्ति व जलकर की जिम्मेदारी भी सौंपी गई, तो लीज शाखा का काम अब अपर आयुक्त अर्थ जैन देखेंगे। वहीं नामांतरण घोटाले की जांच के चलते उपायुक्त केशवसिंह सगर को राजस्व से हटाकर स्वास्थ्य, स्थापना और सेंटर स्टोर भेजा गया है। वहीं अपर आयुक्त आकाश सिंह भी नामांतरण घोटाले की जांच से जुड़े हैं। वे सम्पदा प्रबंधन, राजस्व वृद्धि सेल की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। आयुक्त क्षितिज सिंघल के मुताबिक शासन के ई-नगर पोर्टल पर अब नामांतरण की प्रक्रिया के लिए ओटीपी सिस्टम लागू हो गया है। साथ ही शासन से दो आईटी एक्सपर्ट भी इस जांच के लिए मिले हैं। इतना ही नहीं, रिकॉर्ड दुरुस्ती करवाने के साथ जांच पूरी होने पर दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज करवाएंगे।
आयुक्त सिंघल ने जहां नामांतरण घोटाले के लिए जांच कमेटी बनाई, दूसरी तरफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी। पूर्व में भी कर्मचारियों को हटाया गया था। इसके बाद उपायुक्त पर भी गाज गिरी। वहीं 365 जिन सम्पत्तियों में गड़बड़ियां की गईं और रिकॉर्ड बदले उन्हें भी दुरुस्त किया गया है। यानी जो मूल सम्पत्ति स्वामी थे, उनके नाम पुन: रिकॉर्ड में दर्ज कर दिए हैं। पंजीयन विभाग से जो 51 सम्पत्तियों की सूची प्राप्त हुई उन्हें नामांतरण के बाद बेच भी दिया, उनके भी रिकॉर्ड ठीक करवाए जाएंगे। साथ ही अपर आयुक्त आकाश सिंह द्वारा प्रत्यक्ष में बुलाकर भी संबंधितों से पूछताछ की जा रही है। इनके नाम पर सम्पत्ति कैसे नामांतरित हुई, इसके पीछे कौन सक्रिय रहा। हालांकि अभी तक की पूछताछ में कोई विशेष प्रमाण हाथ नहीं लगे, क्योंकि अधिकांश लोगों ने कहा कि उन्हें पता ही नहीं चला कि उक्त सम्पत्ति उनके नाम कब और कैसे हो गई। दूसरी तरफ आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कराई जा रही है और अंतिम स्तर तक इसे पहुंचाया जाएगा। इसमें जो भी लिप्त हैं उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ अन्य आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन के दो आईटी एक्सपर्ट भी शासन ने दिए हैं, जो जांच समिति को मदद करेंगे, क्योंकि उपायुक्त प्रदीप जैन और केशव सगर की आईडी का इस्तेमाल कर आधी रात के बाद ऑनलाइन सिस्टम के जरिए ये नामांतरण किए गए। इसके चलते अब आईटी एक्सपर्ट इसकी जांच कर पता लगाएंगे कि आखिर किस तरह से आईडी का इस्तेमाल करते हुए ये नामांतरण किए गए। वहीं आयुक्त का यह भी कहना है कि जिस तरह रजिस्ट्री कराने या अन्य रिटर्न भरने से लेकर कई कार्यों के लिए रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर पर ओटीपी आता है उसके बाद ही लॉग इन सहित अन्य प्रक्रिया है। अब तक नामांतरण के मामलों में ओटीपी सिस्टम नहीं था, उसे भी अब लागू करवा दिया है। इंदौर नगर निगम का भी ऑनलाइन सिस्टम शासन के बनवाए ई-नगर पालिका पोर्टल के माध्यम से चलता है। लिहाजा नगरीय प्रशासन और विकास विभाग से बात कर नामांतरण में भी अब ओटीपी सिस्टम लागू कर दिया है। यानी सम्पत्ति मालिक के पास नामांतरण की प्रक्रिया के दौरान ओटीपी जाएगा और उसकी पुष्टि के बाद ही आगे की प्रक्रिया हो सकेगी। इससे आईडी के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा। आयुक्त के मुताबिक जांच में मिले तथ्यों और घोटाले में अगर कोई अधिकारी-कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति लिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि नामांतरण में इस तरह की बड़े पैमाने पर की गई गड़बड़ी उजागर हुई है। इससे शहरभर के जमीन मालिकों को यह डर भी हो गया कि उनकी सम्पत्ति भी सुरक्षित नहीं है। कोई भी नामांतरण कराकर परवारे बेच सकता है, जैसा इस मामले में सामने आया। दो-चार नहीं, बल्कि 354 सम्पत्तियों के नामांतरण रिकॉर्ड में इस तरह हेराफेरी की गई। हालांकि नगर निगम घोटालों के लिए मशहूर रहा है। नामांतरण से पहले फर्जी बिल महाघोटाला भी सामने आ चुका है, जिससे जुड़े तथ्यों का खुलासा सिलसिलेवार अग्निबाण ने किया। इसमें 100 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का भुगतान तक खजाने से हो गया।
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