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सीएजी की गंभीर टिप्पणी, 93 हजार करोड़ का हिसाब अधूरा और 77 हजार करोड़ बजट रह गया अप्रयुक्त

July 24, 2026

नई दिल्ली । बिहार की वित्तीय व्यवस्था (Financial System) को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller And Auditor General) की ताजा रिपोर्ट ने सरकारी खर्च, बजट प्रबंधन (Budget Management) और वित्तीय जवाबदेही पर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। बिहार विधानसभा (Bihar Legislative Assembly) में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2025 तक विभिन्न विभागों द्वारा खर्च की गई लगभग 93 हजार करोड़ रुपये की राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificates) अब तक संबंधित अभिलेखों में उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इससे सार्वजनिक धन के उपयोग की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए जारी धनराशि के उपयोग का प्रमाण देने के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र निर्धारित समय सीमा के भीतर जमा करना अनिवार्य है। बिहार कोषागार संहिता-2011 के अनुसार आवंटित राशि के 18 महीने के भीतर संबंधित विभागों को यह प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होता है। हालांकि बड़ी संख्या में प्रमाण पत्र लंबित रहने से वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही पर असर पड़ने की बात रिपोर्ट में कही गई है। पिछले वर्ष की तुलना में लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्रों के मूल्य में लगभग 26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र पंचायती राज विभाग से जुड़े हैं, जहां करीब 32 हजार करोड़ रुपये का विवरण अभी लंबित है। इसके बाद शिक्षा विभाग के लगभग 19 हजार करोड़ रुपये, नगर विकास एवं आवास विभाग के करीब 17.8 हजार करोड़ रुपये, ग्रामीण विकास विभाग के 6.4 हजार करोड़ रुपये तथा स्वास्थ्य विभाग के लगभग 3 हजार करोड़ रुपये से संबंधित उपयोगिता प्रमाण पत्र अब तक जमा नहीं किए गए हैं। रिपोर्ट में इन विभागों में वित्तीय निगरानी को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

रिपोर्ट में राज्य के बजट प्रबंधन को लेकर भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान बिहार का कुल बजट 3.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, लेकिन सरकार लगभग 2.87 लाख करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी। इस प्रकार कुल बजट का लगभग 21.22 प्रतिशत, यानी करीब 77,340 करोड़ रुपये, उपयोग में नहीं आ सका। रिपोर्ट में कहा गया है कि बजट अनुमान और वास्तविक व्यय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता है ताकि आवंटित संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

सीएजी ने यह भी उल्लेख किया है कि लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्रों के संबंध में वित्त विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन जनवरी 2026 तक विभाग की ओर से कोई उत्तर उपलब्ध नहीं कराया गया। रिपोर्ट के अनुसार समय पर जवाब नहीं मिलने और प्रमाण पत्र लंबित रहने से सरकारी निधियों के उपयोग की प्रभावी निगरानी प्रभावित होती है तथा वित्तीय जोखिम बढ़ने की आशंका बनी रहती है।


  • रिपोर्ट में केंद्र प्रायोजित योजनाओं का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि वर्ष 2024-25 के दौरान अपेक्षित केंद्रीय हिस्सेदारी की तुलना में 441.29 करोड़ रुपये कम राशि स्थानांतरित की गई। साथ ही राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा प्रतिबद्ध व्यय और सब्सिडी पर खर्च होने के कारण विकास योजनाओं और पूंजीगत परियोजनाओं के लिए अपेक्षाकृत कम संसाधन उपलब्ध रहे। सीएजी की यह रिपोर्ट आगामी विधानसभा सत्र में वित्तीय प्रबंधन, बजटीय अनुशासन और सरकारी जवाबदेही को लेकर व्यापक चर्चा का आधार बन सकती है।

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