
इंदौर। माँ अहिल्या की नगरी इंदौर में एक बार फिर मानवता, संवेदनशीलता और अंगदान की मिसाल देखने को मिली। शहर के खजूरी बाजार निवासी 25 वर्षीय गौरव दवे ने निधन के बाद अपने अंगदान के जरिए जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन देने का पुनीत कार्य किया। अंगदान के लिए इंदौर में 68वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। वहीं रामबाग मुक्तिधाम में गौरव दवे को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी गई।
गौरव दवे, पिता सतीश दवे, पेशे से फिल्म कास्टिंग कोऑर्डिनेटर और अभिनेता थे। उनका सपना आगे चलकर एक बड़े अभिनेता के रूप में पहचान बनाने का था। 13 जुलाई को गंभीर ब्रेन हेमरेज के बाद परिजन ने उन्हें इलाज के लिए राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद 26 जुलाई को उन्हें संभावित ब्रेन डेथ घोषित किया गया।
गौरव के मित्र नरेंद्र राठौर के मुताबिक, गौरव ने पहले ही अपने अंगदान की इच्छा जाहिर की थी। उनकी बहन वैदही राठी, बहनोई पलकेश राठी और भाई रितिक चावरे ने अंगदान की प्रक्रिया को समझने के बाद गौरव के माता-पिता सतीश और कविता दवे को बेटे की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए प्रेरित किया। परिवार ने अंगदान के लिए सहमति दी।
गौरव का लिवर राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में उपचाररत एक जरूरतमंद पुरुष मरीज को प्रत्यारोपित किया गया, जबकि दोनों किडनियां चौइथराम हॉस्पिटल में उपचाररत दो अलग-अलग मरीजों को प्रत्यारोपित की गईं। इसके अलावा गौरव के हार्ट, लंग्स, हार्ट वाल्व, पेनक्रियाज और छोटी आंत के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आवंटन प्रक्रिया जारी है। पात्रता और तकनीकी अनुकूलता के अनुसार संबंधित संस्थानों को इन अंगों का आवंटन किया जाएगा।
गौरव के दोस्त नरेंद्र राठौर ने कहा कि युवा साथियों के सार्थक प्रयासों और परिवार की सहमति से यह संवेदनशील एवं परोपकारी अंगदान संभव हो सका। अंगदान की इस पूरी प्रक्रिया में मुस्कान ग्रुप पारमार्थिक ट्रस्ट के सेवादार जीतू बगानी, संदीपन आर्य और लकी खत्री ने समन्वय और सेवा कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गौरव दवे पंचतत्व में विलीन हो गए, लेकिन उनके अंगों के जरिए कई जिंदगियों को नई उम्मीद मिली। 25 साल की छोटी-सी जिंदगी में बड़ा सपना देखने वाले गौरव ने मृत्यु के बाद भी समाज को मानवता और सेवा का बड़ा संदेश दिया।
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