
हाईकोर्ट हाल ही में जता चुकी है नाराजगी
इंदौर। जिला कोर्ट (District Court) में सरकारी वकीलों (Government lawyers) की नई सूची जारी करने को लेकर सरकार (government) के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है। हालत यह है कि यहां एक साल के लिए नियुक्त किए गए जिला लोक अभियोजक सहित दस अपर लोक अभियोजक को तीन साल से ज्यादा का समय हो गया है। एक याचिका पर हाईकोर्ट हाल ही में नाराजगी भी जता चुकी है।
मप्र के विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा 2 अगस्त 2023 को आदेश जारी कर इंदौर में जिला लोक अभियोजक के रूप में अभिजीतसिंह राठौर के साथ 9 अपर लोक अभियोजक के रूप में संजय शर्मा, दिनेश खण्डेलवाल, कोमल दीक्षित, रीना चौधरी, चंद्रशेखर चौधरी, योगेश जायसवाल, अजय मिमरोट, लीलाधर पाटीदार एवं जयंत दुबे को एक साल के लिए नियुक्त किया गया था। इसके कुछ दिन बाद एक और अपर लोक अभियोजक उमेश यादव को नियुक्त किया गया था। इन सरकारी वकीलों की एक साल के लिए हुई नियुक्ति को एक माह पहले अगस्त माह में तीन साल पूरे होकर चौथा साल शुरू हो गया है, मगर नई सूची का कुछ अता-पता नहीं है। हालत यह है कि एक लोक अभियोजक और लगभग 38 अपर लोक अभियोजक के लिए पिछले साल सरकार की ओर से आवेदन बुलवाए गए थे, मगर उन पर भी कोई निर्णय नहीं हो सका है। कहा जा रहा है कि सत्ता के कुछ रसूखदारों की खींचतान के कारण कहानी आगे नहीं बढ़ पा रही है। वर्तमान में जिला कोर्ट में 38 एडीजे कोर्ट हैं, लेकिन मात्र 11 सरकारी वकील होने के कारण सरकार की ओर से पक्ष रखने में कई व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं।
हाईकोर्ट की नाराजगी
हाल ही में ऐसा ही एक मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। डॉ. आंबेडकर नगर (महू) की कोर्ट में निर्धारित कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी पेश हो रहे एक अपर लोक अभियोजक की उपस्थिति को लेकर याचिका दायर कर सवाल उठाए गए थे। इसमें सिंगल बेंच ने इस पर नाराजगी जताते हुए इसे गलत माना और राज्य सरकार को निर्देश जारी करते हुए कहा कि आगामी 8 सप्ताह के भीतर इस पद पर नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करें।
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