
जबलपुर। शहर में गंभीर अपराधों के आरोपियों के जमानत पर रिहा होने के बाद दोबारा आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने की घटनाओं ने पुलिस और न्याय व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। हत्या, दुष्कर्म, चाकूबाजी, बमबाजी और मारपीट जैसे गंभीर मामलों में जेल जा चुके कई आरोपी रिहाई के बाद फिर से सक्रिय हो रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन पर सबसे पहले उन्हीं लोगों को निशाना बनाने के आरोप लग रहे हैं, जिनकी शिकायत या गवाही के आधार पर वे जेल पहुंचे थे।
गवाहों को डराकर कमजोर करने की कोशिश
पुलिस सूत्रों के अनुसार आदतन अपराधियों की पहली कोशिश अपने खिलाफ दर्ज मामलों को कमजोर करना होती है। इसके लिए वे पीडि़त और गवाहों को फोन पर धमकाते हैं, घर पहुंचकर डराते हैं, समझौते का दबाव बनाते हैं और बयान बदलने के लिए मानसिक दबाव डालते हैं। कई मामलों में शिकायतकर्ताओं पर दोबारा हमला करने या उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देने के आरोप भी सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गवाह खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे तो न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होगी और गंभीर मामलों में दोषियों को सजा दिलाना और कठिन हो जाएगा।
निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
पुलिस के पास आदतन अपराधियों की निगरानी के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि थानों में स्टाफ की कमी, लगातार बढ़ते अपराध और सीमित संसाधनों के कारण जमानत पर रिहा अपराधियों की नियमित मॉनिटरिंग नहीं हो पाती। इसी का फायदा उठाकर कई आरोपी अपने पुराने गिरोह के साथ फिर सक्रिय हो जाते हैं और क्षेत्र में दहशत का माहौल बना देते हैं।
रासुका और तड़ीपार भी नहीं बन पा रहे प्रभावी
गंभीर अपराधियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका), जिला बदर (तड़ीपार) और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई जैसे कठोर कदम उठाए जाते हैं, लेकिन कई मामलों में रिहाई के बाद वही आरोपी फिर से अपराध करते दिखाई देते हैं। इससे यह बहस तेज हो गई है कि केवल गिरफ्तारी या जेल भेजना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमानत के बाद भी प्रभावी निगरानी और कानून के पालन की मजबूत व्यवस्था जरूरी है।
चाकूबाजी के मामलों ने बढ़ाई चिंता
पुलिस द्वारा 1 जनवरी से 23 मई 2026 के बीच हुई चाकूबाजी की घटनाओं की समीक्षा में भी यह सामने आया कि कई आरोपी पहले से आपराधिक रिकॉर्ड वाले थे और कुछ जमानत पर रिहा होने के बाद दोबारा हिंसक घटनाओं में शामिल पाए गए। इससे साफ है कि आदतन अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
जमानत के बाद फिर विवादों में आए आरोपी
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