
जबलपुर। वर्षों से दूषित पेयजल, फ्लोराइड, आयरन और जलजनित बीमारियों से जूझ रहे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जिला पंचायत ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। दावा है कि जिले की सभी 521 ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) आधारित पेयजल संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि गांवों में रहने वाले लोगों को कम कीमत पर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। योजना की शुरुआत बरेला विकासखंड के सालीवाड़ा से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो इसे पूरे जिले के सातों विकासखंडों तक विस्तार दिया जाएगा।
जलजनित बीमारियों पर लगेगी लगाम
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पानी के कारण हर वर्ष डायरिया, पीलिया, टाइफाइड और पेट संबंधी बीमारियों के मामले सामने आते हैं। कई इलाकों में पानी में आयरन और फ्लोराइड की अधिकता भी चिंता का विषय रही है। आरओ प्लांट से मिलने वाला शुद्ध पानी इन बीमारियों के खतरे को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
लाखों ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ
योजना लागू होने के बाद जिले के सातों विकासखंडों की 521 ग्राम पंचायतों में रहने वाले लाखों ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध होगा। महिलाओं, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि उन्हें घर के पास ही शुद्ध पानी उपलब्ध हो सकेगा।यदि यह योजना तय समय में धरातल पर उतरती है और आरओ प्लांट नियमित रूप से संचालित होते हैं, तो यह ग्रामीण पेयजल व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। लेकिन यदि निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था मजबूत नहीं हुई, तो यह भी उन योजनाओं की सूची में शामिल हो सकती है, जिनके बोर्ड तो लगे, लेकिन मशीनें कुछ ही महीनों में बंद हो गईं। अब निगाहें सालीवाड़ा के पायलट प्रोजेक्ट पर हैं, जहां से इस पूरी योजना की सफलता या विफलता तय होगी।
सबसे बड़ी परीक्षा होगी रखरखाव
विशेषज्ञों का मानना है कि आरओ प्लांट लगाना आसान है, लेकिन उनका नियमित संचालन, फिल्टर बदलना, बिजली की उपलब्धता और मशीनों का रखरखाव सबसे बड़ी चुनौती होती है। प्रदेश में कई स्थानों पर पहले लगाए गए आरओ प्लांट रखरखाव के अभाव में बंद पड़े हैं। यदि इस योजना के लिए स्थायी संचालन मॉडल नहीं बनाया गया तो करोड़ों रुपये की यह पहल भी अधूरी साबित हो सकती है।
पायलट प्रोजेक्ट पर टिकी नजर
जिला पंचायत पहले चुनिंदा पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट चलाएगी। यहां पानी की गुणवत्ता, मशीनों के संचालन, ग्रामीणों की भागीदारी और आर्थिक मॉडल का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद ही पूरे जिले में योजना लागू करने का निर्णय लिया जाएगा। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक गहलोत के अनुसार, योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद सभी ग्राम पंचायतों तक इसका विस्तार किया जाएगा।
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