
नई दिल्ली । अयोध्या (Ayodhya) स्थित राम मंदिर (Ram Temple) में पूजा व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव किया जा रहा है। मंदिर में श्रीरामलला की सेवा और पूजा करने वाले सभी अर्चक (Priests) अब एक समान ड्रेस कोड (Dress Code) में नजर आएंगे। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार 15 अगस्त (August 15) से सभी अर्चकों के लिए पीत रंग के वस्त्र अनिवार्य किए जाएंगे। गर्मी के मौसम में उन्हें धोती और बिना सिला हुआ अंगवस्त्र पहनना होगा।
नई व्यवस्था के तहत अर्चकों के कंधे पर रखा जाने वाला अंगवस्त्र भी बिना सिला हुआ होगा। इसके लिए रेशमी कपड़े का इस्तेमाल किया जाएगा। मंदिर की पूजा व्यवस्था में वेशभूषा को एकरूप बनाने का निर्णय धार्मिक परंपराओं और शुचिता से जुड़ी मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
अर्चकों के ड्रेस कोड में बदलाव केवल गर्मी के मौसम तक सीमित नहीं रहेगा। मौसम बदलने के साथ वस्त्रों की प्रकृति में भी परिवर्तन किया जाएगा, लेकिन पीत रंग को बनाए रखा जाएगा। शरद और ठंड के मौसम में अर्चकों के लिए मौसम के अनुरूप ऊनी वस्त्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रेशमी और ऊनी वस्त्रों को पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसी आधार पर मंदिर में अर्चकों के लिए एक समान वेशभूषा तय की गई है। इसका उद्देश्य पूजा के दौरान धार्मिक मर्यादा और निर्धारित परंपराओं का पालन सुनिश्चित करना है।
नई व्यवस्था को मंदिर के अर्चकों की ड्यूटी व्यवस्था से भी जोड़ा गया है। रामलला के अर्चकों का रोस्टर अमावस्या और पूर्णिमा के आधार पर बदलता है। इसी वजह से ड्रेस कोड लागू करने की प्रक्रिया भी रोस्टर में होने वाले बदलाव के साथ जोड़ी गई है।
सावन कृष्ण अमावस्या तक सुबह की पाली में सेवा देने वाला अर्चकों का समूह इसके बाद शाम की पाली में जाता है, जबकि शाम की पाली में रहने वाला समूह सुबह की सेवा संभालता है। इसके बाद पूर्णिमा के आसपास फिर से रोस्टर में बदलाव होता है और अगले चरण में नई ड्यूटी व्यवस्था लागू होती है।
ड्रेस कोड को लेकर निर्णय पहले ही लिया जा चुका था, लेकिन नई वेशभूषा में अर्चकों के दिखाई देने की शुरुआत 15 अगस्त से होने की संभावना है। इसके पहले कुछ पूजा अवसरों पर अर्चक पुरानी व्यवस्था के अनुसार ही दिखाई दिए थे। इसी वजह से नई ड्रेस व्यवस्था को लेकर लागू होने की तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई।
मंदिर की पूजा परंपरा में बिना सिले वस्त्रों को विशेष महत्व दिया जाता है। वैष्णव परंपरा में गर्भगृह की मर्यादा और शुचिता को महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान के विग्रह के सामने सेवा और पूजा के दौरान वस्त्रों की पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
धार्मिक न्यास से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार मंदिर के गर्भगृह में पूजा और सेवा के दौरान निर्धारित मर्यादाओं का पालन आवश्यक है। इसी दृष्टि से सिले हुए वस्त्रों के बजाय बिना सिले वस्त्रों को अधिक उपयुक्त माना जाता है।
नई व्यवस्था के लागू होने के बाद राम मंदिर में पूजा करने वाले अर्चकों की वेशभूषा में स्पष्ट एकरूपता दिखाई देगी। मौसम के अनुसार कपड़े बदलेंगे, लेकिन पीत रंग और पूजा के अनुरूप निर्धारित स्वरूप बना रहेगा। इससे मंदिर की सेवा व्यवस्था में अनुशासन और धार्मिक परंपरा के अनुरूप समानता कायम करने का प्रयास किया गया है।
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