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ई-हाजिरी का अजब फसाना: मौजूदगी साबित करने गणित का इम्तिहान!

August 19, 2026

  • तकनीकी खामियों का खामियाजा भुगत रहा स्टाफ, एक क्लिक प्रणाली लागू करने की मांग

जबलपुर। स्कूलों में ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करने की अनिवार्य व्यवस्था शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए बड़ा सिरदर्द बन चुकी है। 10:30 बजे की निर्धारित समय सीमा के कारण एक ही समय हजारों कर्मियों के पोर्टल पर आने से सर्वर क्रैश होने लगा है। इस तकनीकी दबाव को थामने के लिए सिस्टम में लॉगिन और लॉगआउट करते समय साइन स्क्वायर, त्रिकोणमिति और लंबे गुणा भाग के जटिल सवाल जोड़ दिए गए। उपस्थिति प्रक्रिया से पूरी तरह असंबंधित इन गणितीय सवालों के कारण गैर गणित विषय के शिक्षक, प्राथमिक शालाओं के शिक्षक और भृत्य वर्ग उलझ कर रह गए हैं। सर्वर का लोड बांटने की इस प्रशासनिक जुगत ने दैनिक हाजिरी को भारी परेशानी में बदल दिया है।


  • तकनीकी सुधार के बदले प्रताडऩा का आरोप
    शिक्षक संगठनों का कहना है कि वे नियम सम्मत उपस्थिति दर्ज कराने के विरोधी नहीं हैं, लेकिन प्रशासनिक अक्षमता का बोझ कर्मचारियों पर नहीं डाला जाना चाहिए। क्लाउड क्षमता बढ़ाने और बेहतर बैंडविड्थ का उपयोग करने के बजाय कठिन सवाल पूछकर समय खींचना अनुचित है। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर नेटवर्क कनेक्टिविटी के बीच ऐसे सवाल हल करना दोहरी मार साबित हो रहा है। कर्मियों ने मांग की है कि गैर जरूरी पहेलियों को तुरंत हटाकर सरल बायोमैट्रिक अथवा एक क्लिक व्यवस्था लागू की जाए।

    सर्वर लोड रोकने अजब तकनीकी प्रयोग
    10:30 बजते ही प्रदेश भर के स्कूलों में कार्यरत अमला एक साथ अपने मोबाइल पर हाजिरी लगाने का प्रयास करता है। इतनी बड़ी संख्या में एक साथ अनुरोध आने पर पोर्टल का डेटाबेस जाम होकर बंद पड़ जाता था। तकनीकी टीम ने सर्वर को ठप होने से बचाने के लिए उपयोगकर्ताओं को एप पर रोके रखने का तरीका निकाला। लॉगिन स्क्रीन पर ऐसे कठिन अंकगणितीय और त्रिकोणमितीय सूत्र दिए जाने लगे जिनको हल करने में उपयोगकर्ता को 2 से 5 मिनट का अतिरिक्त समय लगे। इससे ट्रैफिक अलग अलग मिनटों में बंट गया, लेकिन कर्मियों का समय बर्बाद होने लगा।

    चपरासी और भाषा शिक्षकों की बढ़ी मुसीबत
    विद्यालयों में कार्यरत भृत्य, चौकीदार और भाषा विषयों के अध्यापकों के लिए यह व्यवस्था विकट चुनौती बन गई है। जो कर्मचारी केवल सामान्य मोबाइल चलाना जानते हैं, वे साइन, कॉस और बहुपदीय गणनाओं को देखकर हल नहीं निकाल पाते। कई शालाओं में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की हाजिरी लगवाने के लिए गणित के अध्यापकों को विशेष रूप से रुकना पड़ता है। गलत उत्तर दर्ज होते ही सिस्टम प्रक्रिया को निरस्त कर देता है, जिससे समय सीमा समाप्त होने पर कर्मचारी अनुपस्थित दर्ज होने के खतरे में पड़ जाते हैं।

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