
नई दिल्ली। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) (Indian Council of Medical Research – ICMR) ने मेडिकल रिसर्च (Medical Research) को लेकर नई गाइडलाइन (New Guidelines) तैयार की है। इसके तहत अब छोटे अस्पताल भी बड़ी स्टडी का हिस्सा बन सकेंगे। आईसीएमआर के अनुसार, कई अस्पतालों और रिसर्च सेंटर में एक साथ होने वाली मेडिकल स्टडी के लिए सिंगल एथिक्स रिव्यू की व्यवस्था की गई है।
मतलब एक ही रिसर्च अगर 10 या 20 अस्पतालों में हो रही है तो हर अस्पताल की एथिक्स कमेटी को पूरी रिसर्च की अलग-अलग जांच करने की जरूरत नहीं होगी। एक तय एथिक्स कमेटी पूरी स्टडी की जांच कर मंजूरी दे सकेगी। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा छोटे अस्पतालों, ग्रामीण इलाकों के सेंटर और कम सुविधाओं वाले रिसर्च सेंटर को मिल सकता है।
जिन सेंटर के पास अपनी एथिक्स कमेटी नहीं है, वे भी बड़ी मेडिकल रिसर्च का हिस्सा बन सकेंगे। एक कमेटी से मंजूरी मिलने का मतलब यह नहीं है कि मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी खत्म हो जाएगी।
रिसर्च के दौरान मरीजों की सुरक्षा पर नजर रखना, गंभीर घटनाओं की जानकारी देना और रिसर्च के नियमों का पालन करना जरूरी रहेगा। रिसर्च में कोई बड़ा बदलाव होता है या मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी समस्या सामने आती है तो उसकी जानकारी भी तय प्रक्रिया के तहत देनी होगी। यानी रिसर्च की मंजूरी एक जगह से मिल सकती है, लेकिन मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सभी संबंधित अस्पतालों की रहेगी।
कई अस्पतालों में होने वाली रिसर्च को एक ही एथिक्स कमेटी देगी मंजूरी
बड़ी संख्या में मरीजों के शामिल होने से फायदा आईसीएमआर की इस नई व्यवस्था का असर सिर्फ रिसर्च की मंजूरी तक सीमित नहीं रहेगा। अगर छोटे अस्पताल और गांवों के आसपास के सेंटर बड़ी मेडिकल स्टडी से जुड़ते हैं तो रिसर्च में अलग-अलग इलाकों के मरीज शामिल हो सकेंगे। इससे किसी बीमारी, नई दवा या इलाज के तरीके पर होने वाली स्टडी में सिर्फ बड़े शहरों के मरीजों के बजाय देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों को शामिल करना आसान होगा।
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